कैमूर के अभिनव बने DSP, 70वीं BPSC में किसान के बेटे ने रचा इतिहास

Kaimur BPSC Success Story : कैमूर जिले के दुर्गावती प्रखंड के अवर्हिया गांव के अभिनव कुमार सिंह ने 70वीं BPSC में 183वीं रैंक हासिल कर DSP पद पाया. किसान परिवार से आने वाले अभिनव ने सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन से यह सफलता हासिल की. उनकी उपलब्धि से गांव और पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है. अभिनव की सफलता अब युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है.

Kaimur BPSC Success Story : (मैनुद्दीन शाह) कैमूर जिले के दुर्गावती प्रखंड के अवर्हिया गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखों में खुशी और गर्व के आंसू ला दिए हैं. किसान नंदा यादव के बेटे अभिनव कुमार सिंह ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 183वीं रैंक हासिल कर डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी डीएसपी बनकर इतिहास रच दिया है. उनकी इस कामयाबी ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे कैमूर जिले का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.

खेतों से निकलकर वर्दी तक का सफर

अभिनव की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती. एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अभिनव ने बचपन से ही संघर्ष को करीब से देखा. घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने कभी उनके सपनों को छोटा नहीं होने दिया. खेतों की मेड़ से लेकर किताबों की दुनिया तक, उन्होंने हर मोड़ पर मेहनत को अपना साथी बनाया.

सीमित संसाधन, लेकिन बड़ा हौसला

अक्सर कहा जाता है कि संसाधनों की कमी सपनों को रोक देती है, लेकिन अभिनव ने इस सोच को गलत साबित कर दिया. पढ़ाई के दौरान कई बार चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत किया. दिन-रात की मेहनत, अनुशासन और एक स्पष्ट लक्ष्य ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया. उनकी सफलता यह बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात चाहे जैसे भी हों, मंजिल जरूर मिलती है.

रिजल्ट आते ही गांव में जश्न

जैसे ही बीपीएससी का रिजल्ट आया और अभिनव के डीएसपी बनने की खबर गांव पहुंची, पूरा माहौल उत्सव में बदल गया. घर पर बधाई देने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी. माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे, तो गांव के लोग गर्व से उनका नाम ले रहे थे. हर कोई यही कह रहा था कि बेटे ने सच में गांव का नाम रोशन कर दिया.

माता-पिता के संघर्ष का मिला फल

अभिनव की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का त्याग और संघर्ष भी छिपा है. एक किसान पिता और साधारण परिवार की परवरिश ने उन्हें जमीन से जुड़ा रखा. यही वजह है कि सफलता मिलने के बाद भी उनकी सादगी और विनम्रता लोगों को छू रही है. उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और कठिन परिश्रम को दिया है.

Also Read: 70वीं BPSC में रोहतास के दो सितारे चमके, नोखा के अंकित बने अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, दीपक बने BDO

युवाओं के लिए उम्मीद की किरण

आज अभिनव कुमार सिंह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. खासकर गांवों में रहने वाले उन छात्रों के लिए, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को छोटा कर लेते हैं. अभिनव की कहानी उन्हें यह विश्वास दिलाती है कि मेहनत और लगन से हर सपना पूरा किया जा सकता है.

आगे की जिम्मेदारी और उम्मीदें

डीएसपी बनने के बाद अब अभिनव के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है. लोगों को उनसे काफी उम्मीदें हैं कि वे अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे. उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि गांव की मिट्टी में भी ऐसे हीरे छिपे होते हैं, जो सही दिशा और मेहनत से चमक उठते हैं.

अभिनव की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, समर्पण और उम्मीद की एक ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने का हौसला देती रहेगी.

Also Read: भरत तिवारी एनकाउंटर मामला, परिवार के आवेदन पर अब तक कार्रवाई नहीं, निलंबित पुलिसवालों की जानकारी भी नहीं मिली

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Ragini Sharma

मैं रागिनी शर्मा वर्तमान में पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की. इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >