शहर में अवैध मांस-मछली की दुकानों का जाल, नियमों की उड़ रहीं धज्जियां

प्रधान सचिव के आदेश का अनुपालन करने में नगर प्रशासन निचले पायदान पर

लाइसेंस सिर्फ चार, अवैध दुकानें दर्जनों # बिना लाइसेंस नगर में जहां-तहां चल रही हैं दर्जनों मांस-मछली की दुकानें # प्रधान सचिव के आदेश का अनुपालन करने में नगर प्रशासन निचले पायदान पर धार्मिक स्थलों व शिक्षण संस्थानों के पास सज रही दुकानें, प्रशासन मौन. # प्रभात खास # मोहनिया सदर. नगर पंचायत में दर्जनों जगहों पर सड़कों के किनारे खुले में अवैध रूप में मांस-मछली की दुकानें खुली हैं. शहर में मांस-मछली की बिक्री करने के लिए सिर्फ चार दुकानदारों को ही नगर प्रशासन द्वारा लाइसेंस निर्गत किया गया है, जिसमें मछली व मुर्गा (चिकन) दुकान शामिल है. इनमें से तीन दुकानें अघोषित मछली मंडी में व एक पटना मोड़ के समीप शहीद बाबा के नजदीक है. सबसे खास बात तो यह है कि जिन दुकानदारों को अनुज्ञप्ति निर्गत किया गया है, वे निर्धारित मानकों को पूरा ही नहीं कर रहे है. इसके बावजूद इनको देखने वाला कोई नहीं है. जबकि, शहर में दर्जनों मांस-मछली के दुकानदारों के पास न अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) है और न ही दुकानों का उचित प्रबंधन, नियमों की अनदेखी कर शहर में अवैध रूप से संचालित मांस-मछली के साथ दुकानदारों को नियमों का अनुपालन कराने व कानून को नजर अंदाज करने वालों की दुकानों को बंद कराने को लेकर नगर विकास व आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने चालू वर्ष की 21 फरवरी को पत्रांक जारी करते हुए सभी नगर निगम के नगर आयुक्त व सभी कार्य पालक पदाधिकारी नगर पर्षद व नगर पंचायत को आदेश जारी किया है. इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि विभिन्न नगर निकायों के अधीन मांस-मछली आदि की अवैध दुकानें संचालित हैं, जो बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 345 के प्रावधानों के प्रतिकूल हैं. ऐसी दुकान या तो बिना अनुज्ञप्ति के संचालित है या अनुज्ञप्ति की शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया है. साथ ही खुले में तथा अस्वास्थ्य परिस्थितियों में मांस की बिक्री की जा रही है और मृत पशुओं को प्रदर्शित किया जा रहा है, यह भी पाया गया है कि ऐसी दुकान धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थाओं तथा अन्य भीड़भाड़ वाली सार्वजनिक स्थलों के निकट हैं. ऐसी स्थिति में निर्देश दिया जाता है कि ऐसी दुकानों के लिए उचित शर्तों के साथ अनुज्ञप्ति निर्गत की जाये और बिना लाइसेंस के संचालित अवैध दुकानों को बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 345 (4) के तहत बंद कराना सुनिश्चित किया जाये # मांस-मछली व मुर्गी बिक्री का क्या है मानक यदि हम मांस-मछली व मुर्गी की बिक्री को लेकर बनाये गये नियमों का अवलोकन करें, तो उसमें स्पष्ट किया गया है कि नगर निकाय में लाइसेंस के बिना मांस मछली व मुर्गी की बिक्री अवैध है. मांस या मछली को सड़क किनारे या खुले में लटका कर नहीं बेचा जा सकता है. दुकान पूरी तरह से ढकी होनी चाहिए, ताकि सड़कों से गुजरने वाले लोगों को बाहर से मांस न दिखे. इसके साथ ही दुकानों से निकलने वाले गंदे पानी और अपशिष्टों का उचित निबटान की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए. दुकान रिहायशी इलाकों या मुख्य सड़कों से हटकर होनी चाहिए. बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 345 के तहत बिना लाइसेंस के मांस मछली या मुर्गी बेचना या खुले में बेचना अपराध है. इसका उल्लंघन करने पर दुकान को सील करने के साथ भारी जुर्माना और सजा का भी प्रावधान है. नियम तोड़ने पर पहली बार दोष सिद्ध होने पर जुर्माना और बाद में प्रत्येक दिन के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है. लेकिन यहां तो जिनके कंधों पर इसके निगरानी की जिम्मेदारी दी गयी है वही अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े हुए हैं. इसका नतीजा है कि सरेआम शहर में अवैध रूप से मटन, चिकन व मछली की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है. किसी को किसी के स्वास्थ्य और भावनाओं की कोई चिंता फिक्र नहीं है. # वीरान पड़ा है मछली बिक्री केंद्र नगर से बाहर डड़वा में फायर ब्रिगेड की बगल कई वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से 12 कमरों वाला मछली बिक्री केंद्र का निर्माण कराया गया है, जहां मछली बिक्री के लिए उचित माहौल तैयार किया गया है. लेकिन नगर प्रशासन की शिथिलता के कारण ओवरब्रिज के नीचे बड़ी संख्या में मछली, मुर्गा और बकरे का मांस खुलेआम सड़क किनारे बेचा जा रहा है. शहर में जहां तहां सड़कों के किनारे खुले में मृत बकरे के शरीर के अंगों को लटका (प्रदर्शित) कर बिक्री किया जाता है. मांस पर सड़कों की उड़ती धूल व गंदगी की परत जमा होती है और उसे लोग खरीदते है. इतना ही नहीं मांस मछली का अवशेष खुले में फेंक कर गंदगी व संक्रमण भी फैलाने से ऐसे दुकानदार तनिक भी परहेज नहीं कर रहे हैं. # लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया यदि हम अनुज्ञप्ति की बात करें तो मांस, मछली व मुर्गा की बिक्री करने वालों को नगर निगम, खाद्य सुरक्षा विभाग, पुलिस और पशु चिकित्सक से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करना अनिवार्य है. इससे संबंधित सभी मानकों का भौतिक सत्यापन करने के साथ सभी कागजी प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद ही नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा लाइसेंस निर्गत किये जाने का प्रावधान है. बड़े शहरों में मुर्गा, मछली व बकरा को काटने के लिए अधिकृत किये गये औजारों के साथ लाइसेंस का सालाना नवीकरण कराने का प्रावधान है. # बोले इओ इस संबंध में पूछे जाने पर नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने कहा कि मांस-मछली बिक्री के लिए अब तक चार लोगों को अनुज्ञप्ति निर्गत किया गया है. शेष जिन लोगों ने लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया है और अवैध तरीके से मांस-मछली नगर में बेंच रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

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By VIKASH KUMAR

VIKASH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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