Kaimur News: शनिवार को हुई करीब दो घंटे की मूसलाधार बारिश ने रामगढ़ नगर पंचायत की जलनिकासी व्यवस्था की पूरी तरह पोल खोलकर रख दी. इस बारिश ने जहां एक ओर किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी, वहीं रामगढ़ बाजार के व्यवसायियों, छात्र-छात्राओं, मरीजों और आम नागरिकों के लिए यह आफत की बरसात साबित हुई. मुख्य बाजार से लेकर अस्पताल, प्रखंड मुख्यालय और ग्राम भारती बालिका विद्यापीठ जाने वाली दोनों मुख्य सड़कें गंदे पानी के तेज बहाव के कारण झील में तब्दील हो गईं. नाले ओवरफ्लो होकर सड़कों और दुकानों में बहने लगे, जिससे लोगों को घुटने भर गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा.
दुर्गा चौक पर दुकानों में घुसा पानी, लाखों का नुकसान
जलजमाव का सबसे विकराल रूप नगर के मुख्य दुर्गा चौक के पास देखने को मिला. राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-319A) के दोनों छोर पर बने नालों से पानी की निकासी न होने के कारण नाबदान का गंदा पानी उफनकर दुकानों में घुस गया. अचानक दुकानों में पानी भर जाने से दुकानदारों में अफरातफरी मच गई और वे बाल्टी व बर्तनों से पानी उलीचते नजर आए. व्यवसायी मोनू गुप्ता, राजू वर्मा, राजेश चौरसिया और बिनोद चौरसिया ने बताया कि दुकानों में पानी घुसने से कीमती सामान भीगकर बर्बाद हो गए, जिससे भारी आर्थिक क्षति हुई है.
दीवार पकड़कर कॉलेज जाने को मजबूर छात्राएं
जलनिकासी की बदहाली का सबसे पीड़ादायक दृश्य ग्राम भारती बालिका विद्यापीठ जाने वाले मार्ग पर दिखा, जहां छात्राएं गंदे पानी से बचने के लिए बाउंड्री वॉल पकड़कर किसी तरह कॉलेज पहुंचीं. वहीं, रेफरल अस्पताल जाने वाले गंभीर मरीज और उनके परिजन गंदे पानी के बीच से निकलने को विवश हुए. पुराने सीडीपीओ कार्यालय परिसर स्थित आधार केंद्र पर भी ग्रामीण व वृद्ध महिलाएं जलजमाव के बीच खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे. प्रखंड की 12 पंचायतों से अपने जरूरी प्रशासनिक कार्यों के लिए पहुंचे ग्रामीणों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी.
सफाई पर हर माह 15 लाख खर्च, फिर भी नाले जाम
समाजसेवी सोनू गुप्ता, बबलू जायसवाल, गुड्डू अग्रहरि और शेख कासिम ने नगर पंचायत की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि नगर की सफाई व्यवस्था पर प्रति माह करीब 15 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है और जनता से भारी-भरकम होल्डिंग व अन्य टैक्स वसूले जाते हैं, लेकिन मानसून से पहले नालों की तली-झाड़ उड़ाही नहीं कराई गई. वर्षों पूर्व बना डेढ़ लाख का सोख्ता भी अनुपयोगी साबित हुआ. स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और रामगढ़ में जलनिकासी के लिए स्थायी नाला निर्माण सुनिश्चित करने की मांग की है.
