शीतकालीन अवकाश में घूमने गये गुरुजी प्रशिक्षण तिथि से परेशान

29 दिसंबर से प्रशिक्षण अनिवार्य, यात्रा पर गये शिक्षकों की बढ़ी चिंता

29 दिसंबर से प्रशिक्षण अनिवार्य, यात्रा पर गये शिक्षकों की बढ़ी चिंता = कोई दक्षिण भारत, तो कोई उत्तरी भारत, तो कोई पहाड़ी क्षेत्र का कर रहा है भ्रमण टिकट बदलना मुश्किल, विभागीय कार्रवाई का सता रहा डर भभुआ नगर. शीतकालीन अवकाश के दौरान सुकून के पल बिताने निकले जिले के कई गुरुजी अब असमंजस व चिंता में घिर गये हैं. दरअसल, 29 दिसंबर से प्रस्तावित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की तिथि नजदीक आते ही उन गुरुजनों की परेशानी बढ़ गयी है, जो पहले से ही मित्रों या परिवार के साथ देश भ्रमण पर निकल चुके हैं. किसी ने उत्तर भारत के धार्मिक स्थलों का रुख किया है, तो कोई दक्षिण भारत या पहाड़ी क्षेत्रों में छुट्टियां मना रहे हैं. लेकिन, प्रशिक्षण की अनिवार्यता ने उनकी यात्रा की खुशी पर चिंता की छाया डाल दी है. शिक्षकों का कहना है कि शीतकालीन छुट्टी घोषित होने के बाद उन्होंने काफी पहले ही रेलवे व अन्य माध्यमों से यात्रा की बुकिंग करा ली थी. कई शिक्षकों का यात्रा से लौटने का रेलवे रिजर्वेशन 31 दिसंबर का है, जबकि प्रशिक्षण 29 दिसंबर से शुरू हो रहा है. ऐसे में उनके सामने असमंजस की स्थिति बन गयी है कि वे प्रशिक्षण में समय पर कैसे शामिल होंगे. देश भ्रमण पर गये कुछ शिक्षकों ने बताया कि 29 दिसंबर से प्रशिक्षण के लिए सूची तैयार होना शुरू हो गया है. अब चिंता हो रही है कि कहीं नाम प्रशिक्षण में आ गया तो समय पर लौटना मुश्किल हो जायेगा. यात्रा पर गये शिक्षकों के लिए अचानक टिकट बदलना या नयी बुकिंग कराना भी आसान नहीं है. इस समय ट्रेनों में भारी भीड़ है और फ्लाइट टिकटों की कीमतें भी काफी अधिक हैं, जो सभी के लिए संभव नहीं है. ऐसे में कई शिक्षक मानसिक तनाव में हैं कि यदि वे समय पर प्रशिक्षण में उपस्थित नहीं हो पाये तो विभागीय कार्रवाई या उपस्थिति को लेकर कोई समस्या खड़ी हो सकती है. कुछ शिक्षकों का कहना है कि प्रशिक्षण आवश्यक है, इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन इसकी तिथि पहले से स्पष्ट होती तो वे उसी अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाते. शीतकालीन अवकाश का उद्देश्य शिक्षकों को वर्ष भर के कार्य से कुछ राहत देना और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर देना है. ऐसे में अवकाश के दौरान प्रशिक्षण की तिथि घोषित होने से असुविधा स्वाभाविक है. इधर शिक्षक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर विभाग का ध्यान आकृष्ट किया है. उनका कहना है कि जो शिक्षक अवकाश के दौरान बाहर गये हैं, उनके लिए प्रशिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था या बाद में प्रशिक्षण का अवसर दिया जाना चाहिए. इससे शिक्षकों की परेशानी कम होगी और प्रशिक्षण की गुणवत्ता भी प्रभावित नहीं होगी. समाधान के लिए संपर्क में जुटे गुरुजी देश भ्रमण पर निकले कई गुरुजी फिलहाल मोबाइल व सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे से संपर्क कर समाधान तलाशने में जुट गये हैं. कोई टिकट की तारीख बदलने की कोशिश कर रहा है, तो कोई अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास कर रहा है. अब देखना यह है कि विभाग इस व्यावहारिक समस्या पर क्या रुख अपनाता है और शिक्षकों को राहत मिलती है या नहीं. क्या कहते हैं डीपीओ इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समग्र शिक्षा अभियान विकास कुमार डीएन ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए जिन शिक्षकों का नाम सूची में शामिल होगा, उनका प्रशिक्षण में शामिल होना अनिवार्य है. अनुपस्थित रहने पर वेतन कटौती करते हुए जवाब तलब किया जायेगा, साथ ही विभागीय कार्रवाई भी की जायेगी.

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Author: VIKASH KUMAR

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