बेखौफ वन माफिया. दो नेशनल हाइवे के बीच दिन-रात सरकारी संपत्ति की लूट मची

दुर्गावती मुख्य नहर के दोनों तटों पर लगे कीमती पेड़ों पर चल रही कुल्हाड़ी

दुर्गावती मुख्य नहर के दोनों तटों पर लगे कीमती पेड़ों पर चल रही कुल्हाड़ी नहर क्षेत्र अवैध कटाई करने वालों के लिए बना सुरक्षित जोन वन अधिकारियों की लापरवाही से धड़ल्ले से काट कर ले जा रहे हरे पेड़ बघिनी-अधवार के पास काटकर रखे गये शीशम के पेड़, विभाग बेखबर मोहनिया सदर. पश्चिम में सियापोखर व पूरब में पसपिपरा के बीच दो नेशनल हाइवे एनएच 319ए व एनएच 319 को जोड़ने वाली दुर्गावती मुख्य नहर के दोनों तटों पर लगे कीमती पेड़ों की अवैध कटाई थमने का नाम नहीं ले रही है. यहां लगे यूकेलिप्टस, शीशम, गम्हार व सागवान जैसे हरे पेड़ों को तस्कर निशाना बना रहे हैं. यह पूरा क्षेत्र अवैध कटाई करने वालों के लिए सुरक्षित जोन बन गया है, जहां दिन-रात सरकारी संपत्ति की लूट मची है. विशेषकर मोहनिया-रामगढ़ पथ से मोहनिया-पटना पथ के बीच नहर के उत्तरी तट पर लगे पेड़ों को सबसे अधिक काटा जा रहा है. इन पेड़ों की बर्बादी के लिए जितने जिम्मेदार तस्कर हैं, उससे कहीं अधिक इस क्षेत्र के वन अधिकारी व कर्मी दोषी हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन पदाधिकारी क्षेत्र में भ्रमण नहीं करते, जिसके कारण माफियाओं के हौसले बुलंद हैं. बघिनी-अधवार मुसहर बस्ती के पास मुख्य नहर में शीशम का पेड़ काटकर रखा हुआ है, ताकि वह सूख जाये व वजन कम होने पर उसे आसानी से ले जाया जा सके. लेकिन किसी वन कर्मी की नजर इस पर नहीं पड़ी. यदि विभाग ईमानदारी से कर्तव्यों का निर्वहन करता, तो इन पेड़ों की जान बच सकती थी. पेड़ों को बचाना सिर्फ विकल्प नहीं, कानून है पर्यावरण की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को शायद यह बोध नहीं है कि पेड़ों की रक्षा करना एक कानूनी बाध्यता है. सरकार ने इसी उद्देश्य से वन विभाग का गठन किया है. विडंबना यह है कि कानून के रखवालों की शिथिलता के कारण ही अपराधी निर्भीक होकर पर्यावरण को असंतुलित कर रहे हैं. सरकारी तंत्र की इस लापरवाही का खामियाजा उन हरे पेड़ों को भुगतना पड़ रहा है, जो सभी जीवों को जीवन दान देते हैं. बिना अनुमति पेड़ों को काटना दंडनीय अपराध पर्यावरण संरक्षण हेतु भारतीय वन कानून अधिनियम 1927 की धारा 68 के तहत पेड़ों की चोरी व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. दोषी पाये जाने पर पर्यावरण न्यायालय में मामला दर्ज किया जा सकता है. इसमें पेड़ की किस्म व मोटाई के आधार पर छह माह से एक वर्ष तक की सजा या उससे अधिक की अवधि व अर्थदंड, अथवा दोनों हो सकते हैं. बोले डीएफओ इस संबंध में पूछे जाने पर डीएफओ संजीव रंजन ने कहा कि हम तुरंत अपने अधिकारी को भेजकर जांच करवाते हैं. हरे पेड़ों की कटाई करने वालों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध एफआइआर दर्ज करायी जायेगी.

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By Vikash kumar

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