कैमूर: कुदरा में दुर्गावती नदी का कहर, डूबा ग्रामीणों का श्रमदान से बना पुल; दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा

कैमूर के कुदरा में दुर्गावती नदी का जलस्तर बढ़ने से श्रमदान से बना पुल डूब गया है। दर्जनों गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूटा, ग्रामीणों में भारी आक्रोश।

Kaimur News : कैमूर जिले के कुदरा बाजार के समीप से गुजरने वाली दुर्गावती नदी मंगलवार को उफान पर रही. नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कुदरा-रामपुर के पास ग्रामीणों द्वारा लाखों रुपये चंदा और श्रमदान से बनाया गया पुल पूरी तरह पानी में डूब गया. पुल के डूबने से दक्षिणी क्षेत्र के दर्जनों गांवों का प्रखंड मुख्यालय से सीधा संपर्क बाधित हो गया है. इससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के साथ बीमार मरीजों, छात्रों, रेल यात्रियों और बाजार आने-जाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गयी है.

पुल डूबा तो दर्जनों गांवों का संपर्क हुआ प्रभावित

दुर्गावती नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से रामपुर के पास बना ग्रामीण पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया. यह पुल आसपास के गांवों के लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन था. पुल पर पानी चढ़ने के बाद दक्षिणी इलाके के ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय पहुंचने में परेशानी हो रही है. जरूरी सामान की खरीदारी से लेकर इलाज, पढ़ाई और अन्य सरकारी व निजी कार्यों के लिए लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है.

मरीजों और छात्रों की बढ़ी मुश्किलें

पुल के डूब जाने से सबसे अधिक परेशानी बीमार मरीजों और छात्रों को हो रही है. ग्रामीणों के अनुसार, आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. वहीं, प्रखंड मुख्यालय और आसपास के शिक्षण संस्थानों में आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रेल से सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी आवागमन प्रभावित हुआ है.

खेतों तक पहुंचा बाढ़ का पानी, फसलों को नुकसान

दुर्गावती नदी के उफान का असर आसपास के खेतों पर भी पड़ा है. नदी का पानी किसानों के खेतों तक पहुंच गया है, जिससे खेतों में लगी फसलें डूबने लगी हैं. पानी लगातार बढ़ने की स्थिति में किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है. ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर कम नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है.

चंदा और श्रमदान से ग्रामीणों ने बनाया था पुल

कुदरा-रामपुर के पास ग्रामीणों ने वर्षों पहले अपनी जरूरतों को देखते हुए लाखों रुपये चंदा जुटाकर और श्रमदान के माध्यम से पुल का निर्माण कराया था. इसी पुल के सहारे आसपास के दर्जनों गांवों के लोग प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचते थे. हालांकि, बरसात और नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ यह पुल कई बार आवागमन के लिए चुनौती बन जाता है.

वर्षों से स्थायी पुल की मांग, कई बार किया आंदोलन

ग्रामीण लंबे समय से यहां स्थायी पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं. इस मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन किया और सड़क जाम भी किया. इतना ही नहीं, निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुनावी सभा के दौरान भी ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मांग और आंदोलन के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका.

प्रस्ताव पास, शिलान्यास के बाद भी निर्माण शुरू नहीं

ग्रामीणों की लंबी मांग और लगातार संघर्ष के बाद सरकार की ओर से इस वर्ष की शुरुआत में कुदरा-रामपुर के पास स्थायी पुल निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था. इसके बाद पुल निर्माण का शिलान्यास भी हो चुका है. लेकिन शिलान्यास के कई महीने बीत जाने के बाद भी स्थल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है. ऐसे में नदी के उफान के बीच ग्रामीणों की मुश्किलें एक बार फिर सामने आ गयी हैं.

निर्माण शुरू होता तो नहीं होती ऐसी परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रस्तावित स्थायी पुल का निर्माण समय पर शुरू कर दिया गया होता तो वर्तमान बाढ़ की स्थिति में उन्हें इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती. पुल के अभाव में हर साल बरसात के दौरान आवागमन बाधित होता है. अब पुल डूबने के बाद लोगों में प्रशासन और सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है. ग्रामीणों ने जल्द से जल्द स्थायी पुल का निर्माण शुरू कराने की मांग की है.

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By सतेंद्र सिंह

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