Kaimur News : खाते में डाल दीजिए 25000, नहीं हो जायेंगे निलंबित

साइबर ठगों पर लगाम कसने के लिए सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में साइबर थाना खोला गया है. साइबर क्राइम को रोकने के लिए प्रत्येक जिले में पुलिस उपाधीक्षक की भी साइबर से संबंधित केसों की जांच के लिए तैनाती की गयी है. इसके बावजूद आये दिन साइबर ठग नये-नये तरीके आजमाकर आम जनमानस के साथ-साथ सरकारी अधिकारी व कर्मियों को भी अपना निशाना बना रहे हैं.

भभुआ नगर. साइबर ठगों पर लगाम कसने के लिए सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में साइबर थाना खोला गया है. साइबर क्राइम को रोकने के लिए प्रत्येक जिले में पुलिस उपाधीक्षक की भी साइबर से संबंधित केसों की जांच के लिए तैनाती की गयी है. इसके बावजूद आये दिन साइबर ठग नये-नये तरीके आजमाकर आम जनमानस के साथ-साथ सरकारी अधिकारी व कर्मियों को भी अपना निशाना बना रहे हैं. कुछ इसी तरह का मामला जिले के चैनपुर प्रखंड सहित जिले के कई प्रखंडों में देखने को मिला. इस बार साइबर ठगों द्वारा विद्यालय में कार्यरत प्रधानाध्यापकों को निशाना बनाया गया है. हालांकि, कई प्रधानाध्यापक ठगो के चंगुल में नहीं फंसे, लेकिन कई प्रधानाध्यापक साइबर ठगों के चंगुल में फंसने से नहीं बच पाये. हालांकि, साइबर ठगो के चंगुल में फंसे प्रधानाध्यापक अपना नाम बताने से कतरा रहे हैं. दरअसल मामला यह है कि शुक्रवार को चैनपुर प्रखंड के एक दर्जन से अधिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के मोबाइल की घंटी बजी, मोबाइल की घंटी बजते ही प्रधानाध्यापक द्वारा मोबाइल फोन को रिसीव किया गया, तो साइबर ठग द्वारा बोला गया कि क्या आप फलाना विद्यालय के प्रधानाध्यापक बोल रहे हैं. आपकी शिकायत पोर्टल पर दर्ज की गयी है कि आपके द्वारा विद्यालय में दी गयी कंपोजिट ग्रांट की राशि से विद्यालय का विकास नहीं किया गया है व राशि को खर्च नहीं किया गया है. इतना सुनते प्रधानाध्यापक अगर कोई जवाब देते तब तक ठग द्वारा प्रधानाध्यापकों से कहा गया कि सोचिये नहीं अगर मामले की जांच हो जायेगी, तो निलंबित हो जायेंगे. तीन महीना निलंबन की कार्रवाई होगी, इसके साथ ही विभागीय कार्रवाई भी होगी. अगर कार्रवाई से बचाना है तो अकाउंट नंबर हम दे रहे हैं तत्काल 25000 रुपये खाते में डाल दीजिये, नहीं तो आप पर कार्रवाई होनी तय है. इधर, विभाग बताकर फोन आने पर कई शिक्षकों ने इसकी जानकारी के लिए प्रखंड कार्यालय, शिक्षा विभाग व जिला शिक्षा विभाग कार्यालय में फोन कर जानकारी प्राप्त की, तो कई प्रधानाध्यापक ठगी के शिकार भी हो गये. हालांकि, ठगी के शिकार हुए प्रधानाध्यापक इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ फोन आने की ही पुष्टि कर रहे हैं. = वाट्सएप ग्रुप पर सूचना दौड़ने पर प्रधानाध्यापक हुए जागरूक फर्जी कॉल के शिकार शायद और भी कई प्रधानाध्यापक होते, लेकिन फर्जी कॉल की पुष्टि के लिए मदरा विद्यालय की प्रधानाध्यापिका उषा कुमारी व मलिक सराय के प्रधानाध्यापक नीरज कुमार सिंह, देऊआ विद्यालय की प्रधानाध्यापिका गीता कुमारी, उरई के रविंद्र सिंह व गांगोडीह के प्रधानाध्यापक कृष्ण कुमार ने बीआरसी कार्यालय में फोन किया, तो मामला सामने आया कि इस तरह से विभाग द्वारा कोई फोन नहीं किया जा रहा है, तब प्रधानाध्यापकों ने इसकी सूचना वाट्सएप ग्रुप पर डाली. इसे वाट्सएप ग्रुप पर मामला आने के बाद कई प्रधानाध्यापक ठगों के चंगुल से बच गये. हालांकि, इससे पहले हरसोती के प्रधानाध्यापक ठगी का शिकार हो चुके थे. = प्रखंड से लेकर जिला शिक्षा विभाग कार्यालय तक चर्चा इधर, फर्जी कॉल के माध्यम से मांगे जा रहे रुपये की चर्चा आग की तरह प्रखंड मुख्यालय से लेकर जिला शिक्षा विभाग कार्यालय में फैल गयी कि पटना से विभाग के अधिकारी फोन कर अकाउंट में रुपये मांग रहे हैं. चर्चा इस कदर बढ़ गयी थी अधिकारियों के कानों तक पहुंच गयी. बोले अधिकारी इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समग्र शिक्षा अभियान ने कहा कि सभी प्रधानाध्यापक इस तरह का कोई भी फोन आने पर कोई भी संवेदनशील या पर्सनल जानकारी नहीं दें, ना ही उनके झांसे में आएं. विभाग द्वारा किसी तरह का ऐसा फोन नहीं किया जा रहा है. जिस नंबर से फोन प्रधानाध्यापकों पर किया गया है, वह फर्जी है और साइबर ठगों द्वारा इस तरह का फोन किया गया है.

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Published by: Prabhanjay kumar

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