कैमूर में प्राकृतिक आपदा से पशुओं की मौत पर मिलेगा मुआवजा, जानिए किस पशु पर कितनी सहायता

प्राकृतिक आपदा से पशुओं की मौत होने पर सरकार पशुपालकों को आर्थिक सहायता देगी। गाय-भैंस पर 37,500 और अन्य पशुओं पर मुआवजे की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Kaimur News : कैमूर जिले में प्राकृतिक आपदा के कारण पशुओं की मौत होने पर अब पशुपालकों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी. बाढ़, आकाशीय बिजली, चक्रवात, भारी बारिश सहित अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं में पशुधन को होने वाले नुकसान को भी सरकारी राहत के दायरे में शामिल किया गया है. निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद पात्र पशुपालकों को पशु की श्रेणी के अनुसार सहायता राशि दी जाएगी.

गाय-भैंस की मौत पर 37,500 रुपये तक सहायता

आपदा विभाग के प्रावधान के अनुसार गाय, भैंस, ऊंट आदि की मौत होने पर प्रति पशु 37,500 रुपये की सहायता राशि मिलेगी. वहीं बैल और घोड़े की मौत पर 32 हजार रुपये तथा बछड़ा, गदहा और खच्चर की मौत पर 20 हजार रुपये की सहायता निर्धारित है.

बकरी-भेड़ और सूअर पर मिलेगा 4 हजार

प्राकृतिक आपदा में बकरी, भेड़ और सूअर की मौत होने पर प्रति पशु 4 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा. इसके अलावा पोल्ट्री फार्म को नुकसान होने की स्थिति में प्रति 100 मुर्गियों के नुकसान पर 10 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है.

पशु शेड क्षतिग्रस्त होने पर भी मिलेगी मदद

आपदा के कारण पशुओं के रहने के लिए बने शेड को नुकसान पहुंचने पर भी राहत का प्रावधान है. इसके तहत पात्र पशुपालक को शेड क्षतिग्रस्त होने पर तीन हजार रुपये तक की सहायता दी जा सकती है.

किन परिस्थितियों में मिलेगा मुआवजा

सरकारी राहत का लाभ अधिसूचित प्राकृतिक आपदा के कारण पशु की मौत होने पर मिलेगा. पशु की मौत का सत्यापन संबंधित अधिकारियों द्वारा कराया जाएगा. पात्रता और सहायता राशि पशु की श्रेणी तथा सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के आधार पर तय होगी.

पशुपालक को पशु की मौत की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन या पशुपालन विभाग को देनी होगी. इसके बाद जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने पर नियमानुसार राहत राशि उपलब्ध करायी जाएगी.

मुआवजे के लिए ऐसे करना होगा आवेदन

प्रभावित पशुपालक को सबसे पहले स्थानीय अंचल कार्यालय में आवेदन देना होगा. आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और पशु क्षति से संबंधित संक्षिप्त विवरण देना होगा. इसके बाद पंचायत के जनप्रतिनिधियों के माध्यम से घटना का सत्यापन कराया जाएगा.

सत्यापन के बाद अंचलाधिकारी मामले की सूचना जिला पशुपालन विभाग को भेजेंगे. सूचना मिलने पर संबंधित क्षेत्र के सरकारी पशु चिकित्सक घटनास्थल पर पहुंचकर मृत पशु का पोस्टमार्टम करेंगे और विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करेंगे. यह रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी जाएगी.

पोस्टमार्टम के बिना नहीं मिलेगा अनुदान

जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिन्हा ने बताया कि प्राकृतिक आपदा, बाढ़, ठनका, आगजनी या बिजली के पोल-तार के संपर्क में आने से पशु की मौत होने पर सरकारी अनुदान के लिए पोस्टमार्टम जरूरी है. पशुधन की क्षति की सूचना मिलने पर चिकित्सकों की टीम को घटनास्थल पर भेजकर जांच करायी जाती है.

जांच के बाद बैंक खाते में होगा भुगतान

सभी अभिलेखों और पशु चिकित्सक की रिपोर्ट की जांच के बाद पात्र पाए जाने पर निर्धारित सहायता राशि स्वीकृत की जाएगी. राहत राशि लाभुक पशुपालक के बैंक खाते में सीधे भेजे जाने का प्रावधान है. इसलिए पशुपालकों को घटना के तुरंत बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर सत्यापन और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करानी होगी.

पशुपालकों के लिए बड़ी राहत

कैमूर के ग्रामीण और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं. ऐसे में प्राकृतिक आपदा में पशुओं की मौत परिवार की आय पर सीधा असर डालती है. सरकार की यह राहत व्यवस्था ऐसे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से उबरने में मदद कर सकती है. हालांकि, सहायता पाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और सरकारी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा.


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By Amit Sinha

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