कैमूर में CMR देने के बाद भी 155 करोड़ रुपये के भुगतान को तरस रहे पैक्स, बढ़ता जा रहा ब्याज का बोझ

बिहार में सीएमआर का 155.18 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने से पैक्स समितियों पर आर्थिक संकट और बैंक ब्याज का बोझ बढ़ गया है। जानें पूरी खबर।

Kaimur News : खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसानों से धान खरीदकर उसकी मिलिंग के बाद बिहार राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) को कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) उपलब्ध कराने वाली जिले की पैक्स समितियों और व्यापार मंडलों की आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है. सीएमआर की आपूर्ति के बावजूद करीब 155.18 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित है. राशि फंसे होने से समितियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो रही है और बैंक ऋण का ब्याज लगातार बढ़ रहा है.

पैक्स अध्यक्षों के साथ बैंक ने की बैठक, भुगतान को लेकर उठी आवाज

सीएमआर की लंबित राशि के भुगतान को लेकर सोमवार दोपहर दी सासाराम-भभुआ सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में प्रखंड के सभी पैक्स अध्यक्षों के साथ बैठक हुई. बैठक में एसएफसी के स्तर पर लंबित राशि का शीघ्र भुगतान कराने को लेकर चर्चा की गयी. बैंक के उपाध्यक्ष विजय बहादुर सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रामगढ़ विधायक, कैमूर डीएम और बिहार राज्य खाद्य निगम के सचिव को पत्र भेजा है. पत्र के माध्यम से लंबित सीएमआर भुगतान जल्द जारी कराने की मांग की गयी है.

2.34 लाख क्विंटल धान की हुई अधिप्राप्ति, 1.57 लाख क्विंटल सीएमआर जमा

दिये गये पत्र के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले की पैक्स समितियों और व्यापार मंडलों ने किसानों से 2,34,383.46 क्विंटल धान की अधिप्राप्ति की. धान की मिलिंग के बाद तैयार 1,57,501.94 क्विंटल सीएमआर बिहार राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराया गया. इसके बावजूद 31 जुलाई 2026 तक आपूर्ति किये गये सीएमआर के एवज में 155.184 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है.

बैंक ऋण का ब्याज बढ़ा, पैक्स पर दोहरा आर्थिक दबाव

पैक्स उपाध्यक्ष विजय बहादुर सिंह ने बताया कि किसानों से धान खरीदने के लिए समितियां बैंक से ऋण लेती हैं. इसी ऋण से किसानों को धान की कीमत का भुगतान किया जाता है. सीएमआर एसएफसी को जमा होने के बाद समितियों को राशि मिलनी चाहिए, लेकिन भुगतान में देरी के कारण बैंक ऋण की देनदारी बनी हुई है और उस पर ब्याज लगातार बढ़ रहा है.

उन्होंने बताया कि धान अधिप्राप्ति के लिए बैंक से लिये गये ऋण पर पैक्स एवं व्यापार मंडलों को करीब 10.75 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है, जबकि एसएफसी की ओर से करीब 7.50 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान किया जाता है. ऐसे में भुगतान में देरी से समितियों को ब्याज के अंतर का भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

भुगतान अटका तो आगामी धान खरीद पर भी पड़ सकता है असर

पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि एक तरफ किसानों से धान खरीदने के लिए लिये गये बैंक ऋण की देनदारी है, तो दूसरी ओर एसएफसी को सीएमआर उपलब्ध कराने के बाद भी करोड़ों रुपये की राशि फंसी हुई है. इससे समितियों की पूंजी का संचालन प्रभावित हो रहा है. यदि लंबित राशि का जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो आगामी धान अधिप्राप्ति की तैयारियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

पैक्स समितियों ने एसएफसी से सीएमआर की लंबित राशि का शीघ्र भुगतान करने और भुगतान में देरी के कारण बढ़ रहे अतिरिक्त ब्याज के बोझ से राहत दिलाने की मांग की है. बैठक में पैक्स अध्यक्ष सतेंद्र सिंह, बीरेंद्र सिंह, बालकेश्वर सिंह, दया शंकर सिंह, प्रेम नाथ सिंह, राजीव कुमार सिंह, गुप्तेश्वर सिंह, गजेंद्र सिंह और अमर नाथ चौधरी सहित कई लोग मौजूद रहे.

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By संजय जायसवाल

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