Kaimur News : अंचल कार्यालय में सोमवार को उस समय गहमागहमी बढ़ गयी, जब भगवानपुर पंचायत के मुखिया उपेंद्र पांडेय और सरैयां पंचायत के मुखिया उमेश दूबे उर्फ मंटू दूबे अपने-अपने पंचायतों के ग्रामीणों के साथ कार्यालय पहुंच गये. दोनों मुखियाओं ने अंचल के पदाधिकारियों और कर्मियों पर उदासीनता, लापरवाही और मनमानी का आरोप लगाते हुए जमकर नाराजगी जतायी.
‘जनप्रतिनिधियों का फोन तक नहीं उठाते अधिकारी’
मुखियाओं ने आरोप लगाया कि अंचल कार्यालय के पदाधिकारी और कर्मी अपने कार्यों के प्रति गंभीर नहीं हैं. जनप्रतिनिधियों के फोन तक रिसीव नहीं किये जाते हैं. इसके कारण ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी पंचायत से अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है. मुखियाओं ने चेतावनी दी कि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जनप्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल समाहरणालय पहुंचकर वरीय अधिकारियों से शिकायत करेगा.
श्मशान की जमीन पर कब्जे के प्रयास का आरोप
मुखिया उपेंद्र पांडेय करीब 25-30 महिला-पुरुषों के साथ अंचल कार्यालय पहुंचे थे. ग्रामीणों ने बताया कि खीरी मौजा में मांझी बस्ती के लोगों के लिए सरकारी श्मशान घाट की जमीन है. लंबे समय से इसी स्थान पर बस्ती के लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता रहा है. ग्रामीणों का आरोप था कि कुछ लोग जमीन पर मड़ई लगाकर अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं.
अंचल कार्यालय में शोरगुल और गहमागहमी की स्थिति बनने पर राजस्व पदाधिकारी आरती कुमारी ने दोनों पक्षों के कुछ लोगों को कार्यालय में बुलाकर समझाया. इसके बाद फिलहाल मामले का अस्थायी रूप से समाधान कराया गया.
15 दिनों से दफ्तर का चक्कर लगा रहे मुखिया
सरैयां पंचायत के मुखिया उमेश दूबे ने कहा कि कन्या विवाह भवन निर्माण से संबंधित कागजी कार्य के लिए वह पिछले 15 दिनों से अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों को ही अपने काम के लिए इतनी परेशानी उठानी पड़ रही है, तो आम लोगों को कितनी भागदौड़ करनी पड़ती होगी.
आरओ बोलीं- आरोप बेबुनियाद
इस मामले में राजस्व पदाधिकारी आरती कुमारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी बात नहीं है. उन्होंने कहा, "मुझे जब किसी ने फोन किया, मैंने उठाया है." उन्होंने मुखियाओं द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया. वहीं, अंचलाधिकारी अल्का कुमारी के विभागीय कार्य से जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय जाने की जानकारी अंचल सूत्रों ने दी.
