Kaimur News : रामपुर प्रखंड क्षेत्र के न्यू प्राथमिक विद्यालय दुबौली में प्रधानाध्यापक के कथित व्यवहार को लेकर ग्रामीणों और बच्चों में आक्रोश है. इसी क्रम में प्रधानाध्यापक से नाराज होकर सोमवार को विद्यालय के सभी बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया. सोमवार को विद्यालय में एक भी बच्चा नहीं पहुंचा.
बच्चों को स्कूल भेजने के लिए गांव पहुंचे प्रधानाध्यापक
बच्चों के विद्यालय नहीं पहुंचने के बाद प्रधानाध्यापक गांव पहुंचे और बच्चों व उनके अभिभावकों से उन्हें विद्यालय भेजने का आग्रह किया. हालांकि, अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजने की बात कहते हुए प्रधानाध्यापक को वापस भेज दिया.
अभिभावकों ने पढ़ाई के बजाय बच्चों से काम कराने का लगाया आरोप
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक बच्चों से विभिन्न प्रकार के काम करवाते हैं और पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते हैं. अभिभावकों के अनुसार प्रधानाध्यापक दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहते हैं. उनका बच्चों की पढ़ाई को लेकर गंभीर रवैया नहीं है. आरोप है कि विद्यालय अवधि में भी बच्चे इधर-उधर घूमते रहते हैं, जबकि विद्यालय के समीप से सड़क गुजरती है. ऐसे में किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है, लेकिन बच्चों को रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है.
बच्चों ने लकड़ी चुनवाने और सफाई कराने का लगाया आरोप
गांव पहुंचे विद्यालय के बच्चों ने भी प्रधानाध्यापक पर गंभीर आरोप लगाये. बच्चों का कहना है कि खाना बनाने के लिए उनसे नहर किनारे से सूखी लकड़ियां चुनवायी जाती हैं. मध्याह्न भोजन (एमडीएम) बनाने के लिए पानी भरवाया जाता है. इसके अलावा विद्यालय के कमरों और परिसर की सफाई भी बच्चों से करायी जाती है. बच्चों ने आरोप लगाया कि सफाई या पानी भरने से इनकार करने पर उनका स्कूल बैग जब्त कर लिया जाता है और मारपीट भी की जाती है. काम पूरा करने के बाद ही बैग वापस दिया जाता है. बच्चों ने एमडीएम के चावल बेचने का भी आरोप लगाया है.
प्रधानाध्यापक को हटाने तक स्कूल नहीं जाने की बात
बच्चों ने कहा कि प्रधानाध्यापक के व्यवहार से तंग आकर उन्होंने विद्यालय जाना छोड़ दिया है. बच्चों का कहना है कि जब तक प्रधानाध्यापक को विद्यालय से नहीं हटाया जाता, तब तक वे स्कूल नहीं जायेंगे.
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ग्रामीणों ने पहले भी अधिकारियों को दी थी सूचना
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानाध्यापक के व्यवहार की जानकारी जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों ने कहा कि यदि बच्चों से पढ़ाई कराने के बजाय काम कराया जायेगा, तो वे अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि तीन दिनों के अंदर प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई कर उन्हें विद्यालय से नहीं हटाया गया, तो विद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जायेगा.
विद्यालय में 18 बच्चे और तीन शिक्षक कर रहे पढ़ाई
बताया जाता है कि विद्यालय में कुल 18 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें नौ छात्र और नौ छात्राएं हैं. इन बच्चों को पढ़ाने के लिए चार शिक्षक-शिक्षिकाएं पदस्थापित हैं. इनमें एक शिक्षक नाजिर अंसारी की प्रखंड में प्रतिनियुक्ति है. ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में तीन शिक्षक आते हैं, जिनमें दो बच्चों को पढ़ाते हैं, जबकि प्रधान शिक्षक मोबाइल में व्यस्त रहने के बाद विद्यालय से चले जाते हैं.
प्रधानाध्यापक ने कहा, अधिकारियों को दी गयी सूचना
इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक संतोष कुमार ने बताया कि सोमवार को विद्यालय में कोई बच्चा नहीं आया. उन्होंने गांव जाकर बच्चों और अभिभावकों से विद्यालय आने के लिए कहा, लेकिन अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से इनकार कर दिया. प्रधानाध्यापक ने बताया कि बच्चों के विद्यालय नहीं आने की सूचना एमडीएम प्रभारी और बीडीओ सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को दे दी गयी है.
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बीडीओ ने जांच कराने की कही बात
इस संबंध में बीडीओ सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ऋतु रंजन कुमार ने बताया कि बच्चे विद्यालय क्यों नहीं गये और पूरा मामला क्या है, इसकी जांच की जायेगी. उन्होंने कहा कि अभिभावकों से मिलकर बच्चों को विद्यालय भेजने का आग्रह किया जायेगा. यदि ग्रामीणों की ओर से आवेदन दिया जाता है, तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जायेगी.
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