बिजली विभाग को हर माह साढ़े नौ करोड़ हो रहा घाटा

18 करोड़ की खरीदी जाती है बिजली, बिल जमा होता है केवल साढ़े नौ करोड़ शहर के 10 हजार चार सौ बिजली उपभोक्ताओं में केवल पांच हजार पांच सौ उपभोक्ता नियमित जमा करते हैं बिल भभुआ शहर : बिजली से अपने घरों को रोशन करनेवाले हजारों उपभोक्ता बिजली विभाग को चूना लगा रहे हैं. विभाग […]

18 करोड़ की खरीदी जाती है बिजली, बिल जमा होता है केवल साढ़े नौ करोड़
शहर के 10 हजार चार सौ बिजली उपभोक्ताओं में केवल पांच हजार पांच सौ उपभोक्ता नियमित जमा करते हैं बिल
भभुआ शहर : बिजली से अपने घरों को रोशन करनेवाले हजारों उपभोक्ता बिजली विभाग को चूना लगा रहे हैं. विभाग को प्रतिमाह करीब साढ़े आठ करोड़ का घाटा हो रहा है. शहरवासियों को बिजली आपूर्ति के लिए भभुआ साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को हर माह 18 करोड़ रुपये की बिजली खरीदनी पड़ती है. इसके एवज में विभाग को हर माह साढ़े नौ करोड़ रुपये ही मिल पाते हैं. यानी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के कई उपभोक्ता बिल जमा नहीं करते हैं.
इससे प्रतिमाह साढ़े अाठ करोड़ रुपये का घाटा विभाग को हो रहा है. शहर में नियमित रूप से महज पांच हजार पांच सौ उपभोक्ता ही अपना बिजली बिल हर माह जमा करते हैं. जबकि, शहर में 10 हजार चार सौ से अधिक उपभोक्ता हैं. ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर कब तक कंपनी घाटा सह कर उपभोक्ताओं को बिजली देगी. अगर उपभोक्ता समय से अपना बिल जमा नहीं करते हैं तो आनेवाले दिनों में ऐसे उपभोक्ताओं की बिजली काट दी जायेगी.
मात्र 500 उपभोक्ता हर माह जमा करते हैं बिल . विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कंपनी को 60-80 मेगावाट बिजली प्रतिमाह खरीदनी होती है. उपभोक्ताओं के बिल जमा नहीं करने से सरकार व कंपनी को राजस्व की क्षति हो रही है. इसका कारण है बिजली की चोरी व उपभोक्ताओं का बिल जमा नहीं करना. विभाग का कहना है कि इस घाटे को खत्म करने के लिए कंपनी नयी नीति बना रही है व प्रीपेड डिजिटल मीटर लगाने की सोच रही है.
बिल में गड़बड़ी के कारण उपभोक्ता परेशान. सूत्रों के अनुसार, उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भारी गड़बड़ी भी है. महीने में ज्यादा बिल आने की शिकायत अधिकतर उपभोक्ता करते हैं. उपभोक्ताओं की शिकायत के बाद भी उसमें सुधार नहीं हो पाता है. इसलिए उपभोक्ता भी बिल जमा करने में आनाकानी करते हैं.

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