अर्धनिर्मित शौचालयों के बीच ओडीएफ घोषित कर दी गयी भोखरी पंचायत

एक भी शौचालय में नहीं लगा दरवाजा भटौली में अधूरे पड़े हैं सभी शौचालय प्रमोहनिया सदर : प्रखंड की तीसरा पंचायत भोखरी को भी बुधवार को अर्धनिर्मित शौचालयों के बीच बीडीओ अरुण सिंह व विधायक निरंजन राम की उपस्थिति में ओडीएफ यानी पूरी तरह खुले में शौचमुक्त होने का गौरव प्राप्त हो गया. कागजों पर […]

एक भी शौचालय में नहीं लगा दरवाजा
भटौली में अधूरे पड़े हैं सभी शौचालय
प्रमोहनिया सदर : प्रखंड की तीसरा पंचायत भोखरी को भी बुधवार को अर्धनिर्मित शौचालयों के बीच बीडीओ अरुण सिंह व विधायक निरंजन राम की उपस्थिति में ओडीएफ यानी पूरी तरह खुले में शौचमुक्त होने का गौरव प्राप्त हो गया. कागजों पर भले ही ओडीएफ का घोड़ा दौड़ गया. लेकिन, धरातल पर शौचालय निर्माण की सच्चाई जानने के बाद एक बार आप भी दंग रह जायेंगे. ग्रामीणों की मानें, तो भोखरी पंचायत का सराय गांव जहां के मुखिया खुद निवासी हैंं, वहां लगभग 60 की संख्या में बनाये गये शौचालयों में एक भी में दरवाजा नहीं लगा है.
जहां मंच से पदाधिकारी ओडीएफ पर लंबा-चौड़ा भाषण दे रहे थे, उसके ठीक सामने बने शौचालय में भी दरवाजा की जगह पर्दा लगाया गया था. इतना ही नहीं मंच के ठीक पीछे बने एक शौचालय में दरवाजा नहीं होने की वजह से कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची भटौली की एक महिला को टॉयलेट जाने के लिए वहां दो महिलाओं को खड़ा कर आड़ का सहारा लेना पड़ा. फिर भी हमारे पदाधिकारियों की नजरों से यह सब कुछ ओझल रहा और मंच से ओडीएफ का ढिंढोरा पीटते रहे. वहीं, भटौली में शौचालय में गेट लगाने की तो बात छोड़िए, एक भी शौचालय का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं है. सराय के रमेश की विधवा मां ने बताया कि मुखिया सुकालू बिंद के रिश्तेदार बढ़ाई बिंद ने ही सभी शौचालयों का निर्माण करवाया है.
दरवाजा की जगह पर्दा लगाने की बात कहते हैं. 12 हजार रुपये भी हमलोगों के खाते से निकलवा कर ले लिए हैं. आज जब अधिकारी आने वाले थे, तो इसके चार दिन पहले ही खुले में शौच जाने से मुखिया भी मना कर रहे हैं. इसके अलावे कार्यक्रम में बिरहा गायिका गीता त्यागी ने संगीतमय प्रस्तुति दी. इस दौरान स्वच्छता समन्वयक आलोक कुमार, दयानंद राम, द्वारिका प्रसाद, लल्लन पासी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे.
शौचालयों में रखे हैं ईंट व लकड़ी: दरवाजाविहिन शौचालय होने का नतीजा है कि उसमें शौच करने की बजाय लोग उसमें लकड़ी व ईंट रखे हुए हैं. जरा सोचिए जब शौचालय का प्रयोग होगा ही नहीं, तो लोग खुले में शौच करने के लिए तो विवश होंगे ही. सिर्फ ओडीएफ का ढिंढोरा पीट देने से पंचायत खुले में शौचमुक्त नहीं हो जायेगी. बल्कि, उसको धरातल पर उतारना होगा और उसका प्रयोग लोगों को करना होगा.
गोलबंद महिलाओं को पड़ा समझाना
शौचालयों में दरवाजा नहीं होने व काफी संख्या में शौचालयों के अर्धनिर्मित रहने से नाराज कुछ महिलाओं ने ओडीएफ का विरोध करने का मन बनाते हुए गोलबंद होना शुरू कर दिया था.
लेकिन, किसी तरह उनको मंच के पीछे ले जाकर समझाया गया. प्रशासन और मुखिया को शायद इस बात का डर था कि कहीं बड़ी संख्या में लोगों के विरोध का सामना न करना पड़े. धरातल पर शौचालय है या नहीं और यदि है तो उसकी स्थिति क्या है. इसको देखनेवाला कोई नहीं है. इससे संबंधित पदाधिकारी अपने दामन को पाक-साफ कहते हैं. एक गरीब जो सही मायने में शौचालय का निर्माण कराता है और प्रोत्साहन राशि के लिए पदाधिकारी से गुहार लगाता है, तो उसे जांच के बाद राशि दिये जाने का हवाला दिया जाता है.
क्या कहती हैं महिलाएं
कार्यक्रम में पहुंची भटौली की सरिता देवी ने उस समय अपनी पीड़ा को बयां किया, जब वह मंच के पीछे कुछ दूरी पर स्थित एक शौचालय में टॉयलेट के लिए गयी और उसमें दरवाजा नहीं होने के कारण दो महिलाओं को अपने सामने खड़ा कर उनकी आड़ में टॉयलेट किया. उसने कहा कि कैसा ओडीएफ यह हम लोगों के साथ बेइमानी है. भटौली में एक भी शौचालय पूर्ण नहीं है. वहीं, भटौली की ही पंच आशा देवी ने कहा कि हमारे यहां एक भी शौचायल को पूर्ण रूप से नहीं बनाया गया है.
क्या कहते हैं मुखिया
इस संबंध में पूछे जाने पर मुखिया सुकालू बिंद ने कहा कि शौचालयों में दरवाजा लग जायेगा. लोग इसका प्रयोग कर रहे हैं.
क्या कहते हैं एसडीएम
इस संबंध में पूछे जाने पर एसडीएम शिवकुमार राउत ने कहा कि हमको कोई जानकारी नहीं है. यदि शौचालय में दरवाजा नहीं है और अर्धनिर्मित है, तो इसकी जांच कर जो भी दोषी होगा कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

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