कर्मचारी के अभाव में 12 बजे तक नहीं हो सकी दर्जनों मरीजों की टूटी हड्डियों की मरहम पट्टी
भभुआ सदर : सोमवार को सदर अस्पताल में टूटी हड्डियों पर प्लास्टर चढ़वाने के लिए अस्पताल आये दर्जनों मरीज दर्द से कहरते रहे और उनके परिजन इमरजेंसी से प्लास्टर करनेवाले कर्मचारी के गायब रहने के चलते भटकते रहे.
चार-पांच घंटे से कोई टूटे हाथ, तो कई पैर की टूटी हड्डी को लेकर दर्द से कहरते रहे, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है. विडंबना यह कि एक सुबह से आये मरीजों का डॉक्टर ने जांच व एक्स-रे भी करवा लिया. महज कर्मचारी के नहीं रहने से एक सुबह से आये मरीजों का प्लास्टर नहीं किया जा सका. सोमवार को अपने पोते के हाथ का प्लास्टर करवाने अस्पताल आये वार्ड छह के काशीनाथ सिंह ने बताया कि सुबह आठ बजे से पोते को डॉक्टर से दिखा व एक्स-रे करवा के बैठे हुए हैं. लेकिन, 12 बज गये अभी तक प्लास्टर करनेवाले कर्मचारी के दर्शन नहीं हुए.
देवर्जिकला के जीतन कुमार मौर्य, वार्ड 17 के अरशद अली आदि का कहना था कि एक तो अस्पताल में प्लास्टर नहीं किया जा रहा है. ऊपर से प्लास्टर का सामान सहित कुछ महंगी दवा भी बाहर से खरीद कर लाने का पर्चा थमा दिया गया है. सोमवार को जब अस्पताल के इमरजेंसी में प्लास्टर नहीं होने के बारे में पता किया गया तो पता चला कि अस्पताल के इमरजेंसी में प्लास्टर का काम करनेवाले चतुर्थवर्गीय कर्मचारी महेंद्र प्रसाद छुट्टी पर थे.
लेकिन, उनके जगह पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा किसी अन्य कर्मचारी की ड्यूटी या वैकल्पिक व्यवस्था किये बगैर अस्पताल में टूटी हड्डियों का इलाज करानेवाले मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया. हालांकि, 12 बजे इसकी सूचना सीएस डॉ नंदेश्वर प्रसाद को मिलते ही उन्होंने तत्काल एक्शन लिया और अस्पताल प्रबंधक को तलब कर इमरजेंसी में प्लास्टर करनेवाले किसी अन्य कर्मचारी को तत्काल तैनात करने का निर्देश दिया. सीएस के निर्देश के बाद अस्पताल प्रबंधक ने कर्मचारी अनिल कुमार को बुला सुबह से बैठे सभी मरीजों का प्लास्टर करवाना शुरू कराया.
पैसा लेकर जाने पर ही मिलेगी सुविधा
कैमूर के सदर अस्पताल में अगर इलाज कराने जा रहे हैं, तो आपको जेब में पैसा लेकर जाना होगा. क्योंकि, सरकार के अधीन चलनेवाले अस्पताल में हर चीज मुफ्त नहीं मिलती. यहां बाहर से दवा भी खरीदनी पड़ सकता है. जिले के सरकारी अस्पताल में दवाओं की घोर किल्लत रहने के कारण मरीजों का हाल बेहाल है. महज चंद दवाओं के सहारे अस्पताल की इमरजेंसी सेवा चल रही है. ऐसे में मरीजों के मर्ज का इलाज कैसे हो रहा है.
इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. वैसे सदर अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों की माने तो उनका कहना है कि दवाएं स्टोर में उपलब्ध है. लेकिन, स्टोर में रखी दवा मरीजों को कब मिलेगी. इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आनेवाले मरीज यह सोच कर आते हैं कि उनके मर्ज का इलाज बिना खर्च हो जायेगा. लेकिन, अस्पताल पहुंचने पर जब उन्हें दवा लाने के लिए कहा जाता है.
ऐसे में मरीजों के कोपभाजन का शिकार डॉक्टरों को या फिर अस्पतालकर्मियों को होना पड़ता है. अस्पताल की इंडोर की बात कौन करें, इमरजेंसी सेवा भी महज कुछ दवाओं के सहारे ही चल रहा है. उसमें भी अधिकतर इमरजेंसी दवाएं नदारद हैं. इतना ही नहीं मरीजों को इमरजेंसी में अपनी हड्डियों की मरम्मत कराने के लिए प्लास्टर के सामान सहित बैंडेज भी बाहर से खरीद कर लाने पड़ते हैं.
