Jahanabad Vishwakarma Puja : जहानाबाद जिले में विश्वकर्मा पूजा को लेकर तैयारियां तेज हो गयी हैं. कल-कारखानों, लघु उद्योगों, वर्कशॉप, वाहन प्रतिष्ठानों और मशीनरी से जुड़े संस्थानों में बुधवार को पूरे दिन साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट का काम चलता रहा. दूसरी ओर पूजा को लेकर बाजार में भी चहल-पहल बढ़ गयी है. लोग पूजन सामग्री के साथ फल, फूल और मिठाइयों की खरीदारी करते नजर आये.
कल-कारखानों और लघु उद्योगों में तैयारी तेज
विश्वकर्मा पूजा के एक दिन पहले जिले में मशीनरी, उद्योग, वाहन और लघु उद्योग से जुड़े कारोबारी तैयारियों में जुटे रहे. छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई के साथ रंग-रोगन कराया गया. इसके बाद दुकानों, वर्कशॉप और संस्थानों को सजाने का काम भी किया गया.
मालिकों के साथ कर्मचारी भी जुटे
पूजा की तैयारी में संस्थानों के मालिकों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारी भी लगे रहे. कई जगहों पर मशीनों, औजारों और कार्यस्थल की विशेष सफाई की गयी. कुछ प्रतिष्ठानों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करने की भी तैयारी की गयी.
दीपावली की तरह हो रही साफ-सफाई
विश्वकर्मा पूजा को लेकर कई संस्थानों में साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम दीपावली की तरह किया जा रहा है. वाहन, वर्कशॉप, मशीनरी और निर्माण कार्य से जुड़े प्रतिष्ठानों को पूजा से पहले तैयार किया जा रहा है.
बाजार में पूजन सामग्री और फल की खरीदारी
पूजा को लेकर जहानाबाद के बाजारों में भी बुधवार को भीड़भाड़ रही. लोग पूजन सामग्री खरीदते नजर आये. कई दुकानों पर फल, फूल और मिठाइयों की खरीदारी भी हुई. पूजा के लिए जरूरी सामान जुटाने को लेकर बाजार में दिनभर चहल-पहल बनी रही.
विश्वकर्मा को शिल्प और निर्माण का देवता मानने की मान्यता
सनातन धर्म की मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार तथा वास्तु एवं निर्माण कला का देवता माना जाता है. प्रत्येक वर्ष कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, इसलिए इसे उनकी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है.
मशीन और औजारों की पूजा की परंपरा
धार्मिक परंपरा के अनुसार विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, मशीनों, औजारों, वाहनों और निर्माण कार्य से जुड़े उपकरणों की पूजा की जाती है. उद्योग और तकनीकी काम से जुड़े लोग इस अवसर पर अपने कार्यस्थल और उपकरणों की पूजा करते हैं.
स्वर्ग और द्वारका के निर्माण से जुड़ी धार्मिक मान्यता
धार्मिक कथाओं में भगवान विश्वकर्मा को स्वर्ग लोक, सोने की लंका, द्वारका और इंद्रप्रस्थ जैसी भव्य नगरी के निर्माण से जोड़ा जाता है. पुष्पक विमान तथा देवताओं के कई अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण का श्रेय भी धार्मिक मान्यताओं में उन्हें दिया जाता है.
17 सितंबर को पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त
आचार्य राजू शास्त्री के अनुसार गुरुवार को सुबह 7:58 बजे से विश्वकर्मा पूजा का शुभ समय शुरू होगा. इसके बाद सुबह 10:43 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक भी पूजा के लिए शुभ समय बताया गया है. इस अवधि में 10:43 से 12:15 बजे तक चर-सामान्य और 12:15 से 1:48 बजे तक लाभ-उन्नति मुहूर्त रहेगा.
शाम में भी पूजा का शुभ समय
बताये गये मुहूर्त के अनुसार गुरुवार शाम 4:52 बजे से 6:24 बजे तक शुभ-उत्तम मुहूर्त में भी पूजा की जा सकती है. वहीं कन्या संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7:58 बजे से दोपहर 2:31 बजे तक बताया गया है.
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 से 12:40 बजे तक
दिन के अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो यह सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा. इस अवधि को भी पूजा के लिए शुभ माना गया है.
दोपहर 1:48 से 3:20 बजे तक राहुकाल
17 सितंबर को दोपहर 1:48 बजे से 3:20 बजे तक राहुकाल रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्य या महत्वपूर्ण पूजा अनुष्ठान करने से बचने की सलाह दी जाती है.
पूजा को लेकर जिले में उत्साह
विश्वकर्मा पूजा को लेकर जिले के कारोबारियों, कारीगरों और मशीनरी से जुड़े लोगों में उत्साह है. प्रतिष्ठानों की सजावट और पूजा की तैयारियों के साथ बाजार में भी खरीदारी बढ़ी है. गुरुवार को विभिन्न संस्थानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की जाएगी.
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