काको मंडल कारा में बंद विचाराधीन कैदी की मौत, हंगामा

जिले के काको मंडल कारा में शराब पीने एवं बचने के मामले में बंद विचाराधीन एक कैदी की मौत गुरुवार की अहले सुबह हो गयी.

जहानाबाद. जिले के काको मंडल कारा में शराब पीने एवं बचने के मामले में बंद विचाराधीन एक कैदी की मौत गुरुवार की अहले सुबह हो गयी. मृत कैदी की पहचान अरवल के मदन सिंह टोला के रहने वाले मूकलाल चौधरी के पुत्र प्रमोद चौधरी (35 वर्ष) के रूप में हुई है जिन्हें पुलिस ने तीन दिन पूर्व शराब पीने एवं बेचने के मामले में घर के समीप से छापेमारी कर पकड़ा था एवं उत्पाद अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई कर जेल भेज दिया था, जहां तबीयत खराब होने के बाद जेल प्रशासन द्वारा जेल अस्पताल में कैदी का इलाज कराया जा रहा था, लेकिन गुरुवार की अहले सुबह अचानक तबियत बिगड़ गयी और बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल में भेजा गया, जहां सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने जांच-पड़ताल कर कैदी को मृत घोषित कर दिया. कैदी अस्पताल पहुंचने के पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया था. घटना की जानकारी मिलते हैं मृतक के परिजन सदर अस्पताल पहुंचे और पुलिस प्रशासन पर मारपीट एवं लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. हंगामा की सूचना नगर थाने की पुलिस को दी गयी. जहां सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराया मृतक की पत्नी फुलवंती देवी एवं साली गुड़िया देवी ने पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाये हैं. परिजनों का कहना था कि जिस दिन प्रमोद को पुलिस ने पकड़ा था. उस दिन वह बिल्कुल ठीक थे, उन्हें किसी प्रकार की बीमारी नहीं थी. साली ने एक्साइज, स्थानीय थाने की पुलिस एवं मंडल कारा के प्रशासन पर इंजेक्शन देकर जान मारने का आरोप लगाया है. साली ने कहा है कि कैदी की मौत कैसे हुई, इसकी गहन जांच होनी चाहिए ताकि हमें इंसाफ मिल सके. उनके परिवार बिल्कुल ठीक थे लेकिन एकाएक मौत होना, यह जांच का विषय है. साली ने बताया है कि मेरे जीजा घर में शराब पीकर सोए हुए थे. तीन थाने की पुलिस गयी, उसके पहले एक्साइज पुलिस पहुंची और कहा कि पकड़ कर ले जायेंगे, जेल जायेगा. इस दौरान कहीं दूसरे जगह से बहुत सारा दारू लेकर आयेे और पुलिस ने कहा कि सब इसी पर चढ़ायेंगे और जेल भेजेंगे. परिवार के सदस्यों का यह भी आरोप है कि जब हम परिवार से मिलने गये तो उत्पाद पुलिस मार कर भगा दिया. इधर अरवल के उत्पाद अधीक्षक नित्यानंद प्रसाद ने इस बाबत बताया है कि शराब बेचने के आरोप में प्रमोद चौधरी को आठ सितंबर को पकड़ा गया था. मृतक की पत्नी फुलवंती ने बताया है कि वह मछुआरा परिवार से हैं. मछली बेच कर परिजनों का भरण-पोषण करते हैं. पति को पुलिस ने आठ सितंबर को गिरफ्तार किया था. इसके बाद गुरुवार को उन्हें सूचना मिली कि आप सदर अस्पताल जहानाबाद आ जाइए. पति की तबीयत खराब है, सेवा करना है, लेकिन जब सदर अस्पताल पहुंचे तो देखा कि मेरे पति मृत अवस्था में पड़े हैं एवं उनके हाथ-पैर अकड़े हुए हैं. देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उनकी मौत कई घंटे पहले हो चुकी थी. इधर जेल अधीक्षक अजीत कुमार ने बताया कि आठ सितंबर को मंडल कारा में कैदी को लाया गया था. उत्पाद अधिनियम धारा 30ए के मामले में कैदी बंद था. हाथ पैर में कंपन होने पर जेल अस्पताल में कैदी का इलाज कराया जा रहा था, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें तड़के सदर अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. जेल अधीक्षक ने कैदी के हार्ट अटैक से मौत होने की आशंका जतायी है. घटना की जानकारी मिलते ही कैदी के परिजन सदर अस्पताल पहुंचे. अपनों की मौत की खबर सुनकर उनका रो-रोकर बुरा हाल है. मृतक केशव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेजा गया है. इस घटना ने जेल व्यवस्था और कैदियों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. गौर करने वाली बात यह है कि अगर कैदी की तबीयत पहले से खराब थी, तो उसे बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में क्यों नहीं भेजा गया, या फिर प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती गयी, तमाम बिंदु जांच का विषय है.

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Author: AMLESH PRASAD

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