अरवल में टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य के सभी जिलों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की गई. इसमें जिला पदाधिकारी अमृषा बैंस ने समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ से भाग लिया. बैठक में टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी), हाउस-टू-हाउस स्क्रीनिंग, संभावित टीबी मरीजों की पहचान, संपर्क अन्वेषण, एक्स-रे और एनएएटी टेस्ट की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई.
सभी पात्र लोगों को समय पर मिलेगा टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी पात्र व्यक्तियों को समय पर टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) उपलब्ध कराया जाए. साथ ही संभावित टीबी मरीजों की जल्द पहचान कर उनकी गुणवत्तापूर्ण जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाए, ताकि जिले में टीबी उन्मूलन अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके.
प्रखंडवार लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने का निर्देश
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद जिला पदाधिकारी अमृषा बैंस ने सिविल सर्जन, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सभी प्रखंडों के वरीय पदाधिकारियों, नोडल पदाधिकारियों और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. उन्होंने निर्देश दिया कि प्रखंडवार टीबी स्क्रीनिंग, एक्स-रे और एनएएटी टेस्ट के निर्धारित दैनिक लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति हर हाल में सुनिश्चित की जाए.
आरबीएसके मोबाइल टीमों से घर-घर चलेगा विशेष अभियान
जिला पदाधिकारी ने कहा कि आरबीएसके मोबाइल टीमों के माध्यम से चिन्हित क्षेत्रों में घर-घर जाकर संभावित टीबी मरीजों की पहचान, स्क्रीनिंग, आवश्यक जांच और जनजागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए. उन्होंने निर्देश दिया कि टीबी स्क्रीनिंग, जांच और उपचार की पूरी प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा अभियान की दैनिक प्रगति पर सतत निगरानी रखी जाए.
जनभागीदारी से टीबी उन्मूलन को मिलेगी नई गति
डीएम अमृषा बैंस ने कहा कि जिला प्रशासन जनभागीदारी के साथ मिशन मोड में टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि समय पर जांच, सही उपचार और व्यापक जनजागरूकता ही टीबी उन्मूलन का सबसे प्रभावी माध्यम है.
