jehanabad News : जहानाबाद जिले के प्रसिद्ध सूफी संत हजरत सैयद शाह मोहम्मद हयात रहमानी रहमतुल्लाह अलैह, अमथुआ शरीफ का सालाना उर्स पारंपरिक शान-शौकत के साथ संपन्न हुआ. पीर-ए-तरीकत हजरत सैयद शाह इरफान अहमद, सज्जादानशीन, खानकाह हयातिया अमथुआ शरीफ की सरपरस्ती में चादरपोशी, कुल व फातेहा के साथ मुल्क व मिल्लत की खुशहाली, अमन-शांति और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई. उर्स में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं और स्थानीय अकीदतमंदों ने शिरकत की.
चादरपोशी कर मांगी सुख-शांति की दुआ
बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन इरशाद अली आजाद, पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार और जदयू प्रदेश महासचिव मेजर इकबाल ने दरगाह पर चादरपोशी की. इस दौरान उन्होंने कहा कि खानकाह हयातिया अमथुआ शरीफ बिहार की प्रसिद्ध खानकाहों में से एक है. सूफी-संत परंपरा से जुड़े इस खानकाह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मुराद लेकर पहुंचते हैं और सुख-शांति की कामना करते हैं.
सूफी सर्किट से जोड़ने का प्रयास
नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सूफी संतों की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. खानकाह हयातिया अमथुआ शरीफ को सूफी सर्किट से जोड़ने और इसके जीर्णोद्धार के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा. इससे क्षेत्र में पर्यटन और सूफी परंपरा को भी बढ़ावा मिलेगा.
जिला प्रशासन का किया गया स्वागत
चादरपोशी के लिए अमथुआ पहुंचे चेयरमैन और जिला प्रशासन के अधिकारियों का खानकाह हयातिया के नाजिम एवं मुखिया सैयद मेराज अहमद सुड्डु ने स्वागत किया. इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने भी दरगाह पर हाजिरी दी और सुख-शांति की दुआ की. उर्स में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों, देश के विभिन्न शहरों से आए श्रद्धालुओं और जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में भाग लिया.
कुरआनखानी से हुई उर्स की शुरुआत
उर्स समारोह की शुरुआत सुबह कुरआनखानी, कुल और फातेहा से हुई. इसके बाद नमाज-ए-जोह्र के बाद लंगर का वितरण किया गया. नमाज-ए-असर के बाद महफिल-ए-मिलादुन्नबी का आयोजन हुआ. वहीं नमाज-ए-मगरिब के बाद चादरपोशी और गुलपोशी की गई. पीर-ए-तरीकत हजरत सैयद शाह इरफान अहमद की सरपरस्ती में विशेष दुआ का आयोजन हुआ.
देर रात तक चली सूफियाना कव्वाली
नाजिम-ए-उर्स सैयद मेराज अहमद सुड्डु ने बताया कि उर्स समारोह के अंत में सूफियाना कव्वाली का आयोजन किया गया, जो देर रात तक चला. उन्होंने कहा कि दरगाह हजरत सैयद शाह मोहम्मद हयात रहमानी रहमतुल्लाह अलैह को सूफी सर्किट से जोड़कर इसके चौतरफा विकास की जरूरत है, ताकि जिले में सूफी संतों की परंपरा को और अधिक विकसित किया जा सके. कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक, एसडीपीओ घोसी, काको थानाध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
