Scientific Pulse Cultivation In Jehanabad : जहानाबाद में संयुक्त कृषि भवन के सभागार में मंगलवार को आत्मा के तत्वावधान में ‘दलहन फसलों की वैज्ञानिक खेती’ विषय पर दो दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक वार्ता कार्यक्रम शुरू हुआ. कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि विज्ञान केंद्र, गंधार के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार, उप निदेशक कृषि अभियंत्रण अजय कुमार, सहायक निदेशक प्रक्षेत्र ब्रजेश कुमार एवं उप परियोजना निदेशक आत्मा राकेश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
कम पानी में भी लाभकारी है दलहन की खेती
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को दलहनी फसलों की अधिक से अधिक खेती करने के लिए प्रेरित किया. वक्ताओं ने कहा कि व्यावसायिक और टिकाऊ कृषि के लिए दलहन फसलों का उत्पादन काफी महत्वपूर्ण है. दलहनी फसलों की खेती में अपेक्षाकृत कम पानी और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है. ऐसे में सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए भी दलहन की खेती लाभकारी साबित हो सकती है.
अरहर, चना, मसूर, मूंग और उड़द की खेती पर जोर
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि अरहर, चना, मसूर, मूंग, उड़द एवं मटर जैसी दलहन फसलें मानव आहार में प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं. दालों की मांग लगातार बनी रहती है. ऐसे में किसान उपयुक्त किस्म, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं.
वैज्ञानिकों ने कहा कि धान-गेहूं आधारित फसल प्रणाली में दलहनी फसलों को शामिल करने से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलता है और कृषि जोखिम कम करने में मदद मिलती है. कम पानी में तैयार होने वाली कई दलहन फसलें वर्षा आधारित और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी हैं.
मिट्टी की उर्वरता सुधारने में भी मददगार
फसल चक्र में दलहन को शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य में सुधार के साथ कीट एवं रोगों के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है. किसानों को दलहन फसलों की खेती को फसल चक्र का हिस्सा बनाने की सलाह दी गयी.
रोग-कीट प्रबंधन की दी गयी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने दलहनी फसलों में लगने वाले विभिन्न रोग, कीट एवं व्याधियों की जानकारी दी. उन्होंने किसानों को इनके वैज्ञानिक प्रबंधन के उपाय भी बताये. किसानों को बेहतर पैदावार के लिए उन्नत बीज का चयन, उचित समय पर बुआई, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा रोग-कीट नियंत्रण की तकनीक अपनाने की सलाह दी गयी.
23 सितंबर तक चलेगा कार्यक्रम
मौके पर सहायक निदेशक शस्य विवेक कुमार, सत्यजीत कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी स्वाती सुमन समेत किसान विजय कुमार सिंह, कृष्ण मुरारी ठाकुर, बालेश्वर प्रसाद, धर्मशील देवी, भोला केवट सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे. उप परियोजना निदेशक आत्मा राकेश कुमार ने बताया कि कृषक-वैज्ञानिक वार्ता कार्यक्रम 23 सितंबर तक आयोजित किया जायेगा.
