Arwal News: प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों में नाबालिग बच्चों और किशोरों के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है. ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि कम उम्र के कई बच्चे नशीले पदार्थों की चपेट में आ रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई-लिखाई प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है.
युवाओं को नशे की ओर धकेल रहे असामाजिक तत्व
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व आर्थिक लाभ के लिए नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहे हैं और युवाओं व किशोरों को इसकी ओर आकर्षित कर रहे हैं. लोगों ने ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है.
जनजागरूकता अभियान की जरूरत
समाजसेवियों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है. इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि बच्चों और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जा सके.
पुलिस कर रही काउंसलिंग
मेहंदिया थानाध्यक्ष मनोरंजन कुमार ने बताया कि नशे की चपेट में आए युवाओं और नाबालिगों की सूचना मिलने पर उनके अभिभावकों को थाना बुलाकर बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा की जाती है. परिवार के सहयोग से बच्चों को नशे की लत से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन काउंसलिंग के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत करा रहा है और उन्हें इस बुरी आदत से दूर करने का प्रयास कर रहा है. हालांकि यह एक सामाजिक समस्या है और इसका समाधान तुरंत संभव नहीं है, फिर भी पुलिस लगातार प्रयासरत है.
अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील
थानाध्यक्ष ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें, उन्हें सकारात्मक वातावरण दें और यदि किसी प्रकार की नशे की प्रवृत्ति दिखाई दे तो तुरंत परिवार और पुलिस का सहयोग लें.
उन्होंने कहा कि समाज, परिवार और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर उनका भविष्य सुरक्षित बनाया जा सकता है.
