मखदुमपुर के नेर गांव में अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, पइन पर बने आठ मकान ध्वस्त

Jehanabad News: जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड अंतर्गत नेर गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. अंचलाधिकारी के नेतृत्व में जल स्रोत (पइन) पर अवैध कब्जा कर बनाए गए आठ मकानों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया.

Jehanabad News (रमेश कुमार की रिपोर्ट): जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड के नेर गांव में शुक्रवार को अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है. इसके तहत जल स्रोत (पइन) पर किए गए अवैध कब्जे को पूरी तरह हटा दिया गया है. अंचलाधिकारी रंजीत उपाध्याय के कुशल नेतृत्व में चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान पइन को भरकर अवैध तरीके से बनाए गए आठ पक्के व कच्चे मकानों को जेसीबी (JCB) मशीन की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया. प्रशासन की इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के अतिक्रमणकारियों में भारी हड़कंप मच गया है.

बाधित हो रहा था जल प्रवाह

अंचलाधिकारी ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि नेर गांव में जल निकासी एवं जल संरक्षण के सबसे महत्वपूर्ण स्रोत पइन पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण कर ऊंचे मकान बना लिए गए थे. जिसके कारण क्षेत्र का प्राकृतिक जल प्रवाह पूरी तरह बाधित हो रहा था. सरकारी अभिलेखों की सघन जांच और मौके पर की गई पैमाइश के आधार पर सख्त कार्रवाई करते हुए बउआ नन्द दास, बोधू दास, विजय दास समेत कुल आठ लोगों के अवैध मकानों को जमींदोज कर हटा दिया गया है.

अतिक्रमण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के कड़े निर्देशानुसार सार्वजनिक भूमि, पारंपरिक जल स्रोतों और सरकारी संपत्तियों पर किए गए किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मखदुमपुर अंचल प्रशासन आगे भी ऐसे सार्वजनिक कल्याण से जुड़े अभियान लगातार जारी रखेगा. इसके साथ ही सभी चिह्नित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा.

सरकारी भूमि बचाने की अपील जारी

इस बड़ी कार्रवाई के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीण लोगों से सरकारी भूमि एवं पारंपरिक जल स्रोतों को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त रखने की पुरजोर अपील की है. अधिकारियों ने सचेत किया है कि जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने से आने वाले समय में पर्यावरण और खेती-किसानी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए ग्रामीण इस कार्य में प्रशासन का सहयोग करें.

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Published by: Vikas Jha

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