जहानाबाद में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, सिविल सर्जन के औचक निरीक्षण में डॉक्टर रहें नदारद, होगी कार्रवाई

Jehanabad News: जहानाबाद के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है. सिविल सर्जन डॉ. हरिश्चंद्र चौधरी द्वारा मखदुमपुर प्रखंड के अस्पतालों के औचक निरीक्षण के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है. सुगांव एपीएचसी से दोनों डॉक्टर ड्यूटी से गायब मिले, जबकि धराउत एपीएचसी में दो की जगह केवल एक ही डॉक्टर उपस्थित थे.

Jehanabad News: (संजय अनुराग की रिपोर्ट) जहानाबाद जिले के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के अपनी रोस्टर ड्यूटी से गायब रहने के रवैये पर लगाम नहीं लग पा रहा है. आए दिन सिविल सर्जन या प्रशासनिक पदाधिकारियों के निरीक्षण में डॉक्टरों की मनमानी उजागर हो रही है. ताजा मामला मखदुमपुर प्रखंड के धराउत और सुगांव अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है. शनिवार को जहानाबाद के सिविल सर्जन डॉ. हरिश्चंद्र चौधरी मखदुमपुर प्रखंड के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे. इस दौरान डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही सामने आई.

सिविल सर्जन सबसे पहले सुगांव एपीएचसी पहुंचे. निरीक्षण के दौरान अस्पताल का नजारा देखकर वे हैरान रह गए क्योंकि वहाँ ड्यूटी पर तैनात एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे. सिविल सर्जन ने बताया कि रोस्टर के अनुसार वहां डॉक्टर पंकज कुमार और डॉक्टर जितेंद्र कुमार की ड्यूटी लगी थी, लेकिन दोनों ही अस्पताल से नदारद थे. इसके कारण मरीज बिना इलाज के परेशान दिखे.

धराउत में भी एक डॉक्टर गायब, वेतन काटने का सख्त निर्देश

सुगांव के बाद सिविल सर्जन मखदुमपुर प्रखंड के ही धराउत एपीएचसी का निरीक्षण करने पहुंचे. वहाँ भी रोस्टर के अनुसार दो डॉक्टरों की तैनाती थी, लेकिन मौके पर केवल एक ही डॉक्टर उपस्थित मिले. सिविल सर्जन ने बताया कि वहां ड्यूटी पर डॉक्टर संगीता कुमारी उपस्थित थीं, जबकि डॉक्टर अमित कुमार वर्मा अपनी ड्यूटी से गायब पाए गए.

निरीक्षण के दौरान मिली इस भारी अव्यवस्था पर सिविल सर्जन ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने मखदुमपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को तत्काल निर्देश दिया है कि अनुपस्थित तीनों डॉक्टरों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण पूछा जाए और उनका वेतन काटने की कार्रवाई की जाए. उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी परिस्थिति में रोस्टर ड्यूटी से अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जो भी चिकित्सक लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ पहले वेतन कटौती होगी और यदि सुधार नहीं हुआ, तो सीधे राज्य स्वास्थ्य विभाग को बर्खास्तगी या विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा.

सदर अस्पताल की इमरजेंसी का भी यही हाल, 6 घंटे की ड्यूटी में करते हैं ‘हाफ-हाफ’

यह स्थिति सिर्फ ग्रामीण इलाकों की नहीं है, बल्कि जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल का भी यही हाल है. सिविल सर्जन और प्रशासनिक अधिकारियों के औचक निरीक्षण में कई बार सदर अस्पताल के डॉक्टर भी ड्यूटी से गायब पाए गए हैं. समय पर इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं मिलने के कारण पूर्व में कई बार अस्पताल में हंगामा हो चुका है और समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की जान तक जा चुकी है.

सदर अस्पताल की इमरजेंसी में एक साथ दो डॉक्टरों की रोस्टर ड्यूटी निर्धारित है. इसके बावजूद धरातल पर एक समय में एक ही डॉक्टर ड्यूटी पर नजर आते हैं और दूसरे गायब रहते हैं. अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, छह घंटे की शिफ्ट में दोनों डॉक्टर आपस में ही सांठगांठ कर तीन-तीन घंटे की ड्यूटी बांट लेते हैं. सिविल सर्जन ने इस मामले में भी डॉक्टरों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वे अपनी आदतों में सुधार नहीं लाते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

इसके बाद सिविल सर्जन ने मखदुमपुर सीएचसी का भी निरीक्षण किया, जहाँ राहत की बात यह रही कि सभी डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित पाए गए. सिविल सर्जन ने सभी पीएचसी और सीएचसी के प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से निगरानी रखने और औचक निरीक्षण करने का सख्त निर्देश दिया है.

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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