मेटरा-गिरधरपुर मुख्य सड़क पर वर्षों से जर्जर पड़े पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन पुल के दोनों ओर एप्रोच (फ्लैंक) में अब तक मिट्टी भराई नहीं होने से लोगों की परेशानियां बरकरार हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी की लापरवाही के कारण पुल का सुचारु उपयोग नहीं हो पा रहा है. बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जिससे राहगीरों और किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
डायवर्सन नहीं हटने से किसानों की बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण के दौरान आवागमन बनाए रखने के लिए पुल के बगल में डायवर्सन बनाया गया था. पुल तैयार होने के बाद भी डायवर्सन पूरी तरह नहीं हटाया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसे जल्द नहीं हटाया गया तो आने वाले दिनों में खेतों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
बाढ़ के खतरे से सहमे आसपास के गांव
मेटरा, तुलसीपुर, गिरधरपुर, मोकमविगहा सहित आसपास के कई गांवों के लोगों में फल्गु नदी के जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ गई है. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष आई बाढ़ के दौरान इसी मार्ग का संपर्क पूरी तरह टूट गया था. उस समय प्रशासन ने केवल मिट्टी भराई कर अस्थायी रूप से आवागमन बहाल कराया था, लेकिन सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई. ऐसे में इस वर्ष बाढ़ आने पर फिर से वही स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है.
स्कूली बच्चों और मरीजों पर भी संकट
ग्रामीणों का कहना है कि अधूरी एप्रोच सड़क और कमजोर मरम्मत के कारण बरसात में सड़क के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है. यदि सड़क टूटती है तो आवागमन बाधित होगा, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ेगी.
ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि पुल के दोनों ओर तत्काल मिट्टी भराई कर एप्रोच सड़क को दुरुस्त कराया जाए. साथ ही निर्माण के दौरान बनाए गए डायवर्सन को हटाकर सिंचाई व्यवस्था को सुरक्षित किया जाए. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो बरसात और संभावित बाढ़ के दौरान क्षेत्र के कई गांवों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
