Jahanabad Hospital Fire Safety News(संजय अनुराग): मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में भीषण आग लगने से 6 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे बिहार के अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. इस बीच जब हमारे संवाददाता ने जहानाबाद जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों की ग्राउंड रियलिटी की पड़ताल की, तो बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले नतीजे सामने आए हैं. साफ है कि अगर मुजफ्फरपुर जैसा कोई भी छोटा या बड़ा हादसा जहानाबाद में हुआ, तो यहाँ भारी कोहराम मचना तय है क्योंकि जिले के सबसे बड़े अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है.
फाइबर की दीवारें और भागने का सिर्फ एक रास्ता, संकीर्ण मार्ग पर रखे हैं कार्टन
सदर अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को तोड़ दिया गया है और नई गगनचुंबी बिल्डिंग का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो सका है. इस वजह से फिलहाल इमरजेंसी सेवाओं को अस्थाई रूप से सदर अस्पताल के ‘पिक्कू वार्ड’ में शिफ्ट किया गया है. यह पूरी बिल्डिंग फैब्रिकेटेड (फाइबर और प्लास्टिक) से बनी हुई है. खुदा न खास्ते अगर इसमें आग लगती है, तो बेड, गद्दे और फर्नीचर के साथ-साथ यह पूरी बिल्डिंग मोम की तरह पिघलने लगेगी. सबसे खतरनाक बात यह है कि इस वार्ड में आने और जाने के लिए मात्र एक ही सिंगल दरवाजा है. कोई दूसरा इमरजेंसी एग्जिट (निकास द्वार) है ही नहीं. उस इकलौते संकीर्ण रास्ते पर भी अस्पताल प्रबंधन ने भारी मात्रा में मेडिकल कार्टन रख दिए हैं, जिससे रास्ता और छोटा हो गया है. हादसे के वक्त मरीजों और तीमारदारों को भागने के लिए पर्याप्त जगह भी नसीब नहीं होगी. यही हाल फाइबर से बने जच्चा-बच्चा वार्ड का भी है.
फायर अलार्म और हाइड्रेंट सिस्टम शून्य, लगे हुए 34 में से 6 एक्सटिंग्विशर भी खराब
पूरे सदर अस्पताल की किसी भी बिल्डिंग में न तो कोई ऑटोमैटिक फायर अलार्म सिस्टम लगा है और न ही पानी की बौछार करने वाला हाइड्रेंट सिस्टम. अस्पताल की सुरक्षा केवल दीवारों पर टंगे लाल सिलेंडर (फायर एक्सटिंग्विशर) के भरोसे है. दमकल विभाग के हालिया सर्वे के मुताबिक, पूरे अस्पताल परिसर में कुल 34 फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं, जिनमें से 6 सिलेंडर पहले से ही खराब और कबाड़ हो चुके हैं. जिले के 2 रेफरल अस्पताल, 3 सीएचसी, 4 पीएचसी, 29 एपीएचसी और 131 हेल्थ वेलनेस सेंटरों का भी यही हाल है, जहाँ अलार्म जैसी कोई आधुनिक तकनीक मौजूद नहीं है.
प्राइवेट नर्सिंग होम का हाल और भी बदतर: 75% अस्पतालों के पास ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ नहीं
| कुल निजी अस्पताल (जहानाबाद) | फायर ब्रिगेड से मिली वैध NOC | बिना NOC चल रहे अस्पताल (75%) |
| 60 | केवल 15 | 45 |
निजी नर्सिंग होम की स्थिति तो रूह कंपाने वाली है. जिले में संचालित 60 में से 45 अस्पतालों ने अग्निशमन विभाग से एनओसी (NOC) लेने की जहमत तक नहीं उठाई है. जांच के दौरान कई निजी अस्पतालों में लगे अग्निशमन उपकरण पूरी तरह डिफंक्ट (खराब) पाए गए. जब फायर ब्रिगेड की टीम फिदा हुसैन मोड़ के पास स्थित रामेश्वरी अस्पताल में औचक निरीक्षण के लिए पहुंची, तो वहां लगे 3 एक्सटिंग्विशर में से 2 पूरी तरह खराब मिले. इस अस्पताल ने साल 2023 के बाद अपनी एनओसी का नवीनीकरण (रिन्यू) तक नहीं कराया है. पिछले साल 60 में से 58 अस्पतालों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन इस साल भारी कोताही बरती जा रही है.
अधिकारियों का दोटूक रुख: सीधे सील होंगे दोषी अस्पताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए जहानाबाद के जिला अग्निशमन पदाधिकारी स्नेही सोनल ने दोटूक लहजे में कहा, “जिन अस्पतालों ने सर्वे और एनओसी के लिए अब तक ऑनलाइन आवेदन नहीं किया है, उन्हें अंतिम नोटिस भेजा जा रहा है. इसके बावजूद अगर वे नियमों का पालन नहीं करते हैं और लापरवाही बरतते हैं, तो बिना कोई मौका दिए उनके अस्पताल परिसर को तत्काल प्रभाव से सील (Lock) कर दिया जाएगा.”
दूसरी ओर, जिला स्वास्थ्य समिति जहानाबाद के डीपीएम खालिद हुसैन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सदर अस्पताल की मुख्य नई बिल्डिंग अभी तैयार हो रही है. उसके पूरी तरह बन जाने के बाद वहां फायर सेफ्टी से लेकर तमाम आधुनिक और वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं बहाल कर दी जाएंगी. फिलहाल पिक्कू वार्ड में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद रखे गए हैं.
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