गया से गंगा तक 300 किमी का नदी कॉरिडोर, बोधगया की फल्गु होगी बारहमासी, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने फल्गु नदी को बारहमासी बनाने की योजना को मंजूरी दी है। एनएचएआई नदी की डी-सिल्टिंग कराएगा, जिससे गया जी में श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल मिलेगा।

विश्व प्रसिद्ध फल्गु (निरंजना) नदी को अविरल और बारहमासी बनाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है. केंद्र सरकार ने नदी पुनर्जीवन योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. बुधवार को परिवहन भवन के सागर मंथन सभागार में चार केंद्रीय मंत्रालयों की उच्चस्तरीय बैठक में योजना को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये.

चार केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में बनी सहमति

बैठक की अध्यक्षता सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की. इसमें केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे. बैठक में फल्गु नदी के पुनर्जीवन और इसके जल प्रवाह को सालभर बनाए रखने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई.

एनओसी मिलते ही शुरू होगा नदी पुनर्जीवन का काम

बैठक में तय किया गया कि बिहार और झारखंड सरकारों से एनओसी मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नदी पुनर्जीवन के पहले चरण का काम शुरू करेगा. नदी के जिन हिस्सों में गाद जमा होने के कारण जल प्रवाह प्रभावित है, वहां डी-सिल्टिंग और खुदाई करायी जायेगी.

नदी से निकली मिट्टी का हाईवे निर्माण में होगा इस्तेमाल

योजना के तहत नदी की सफाई और खुदाई से निकलने वाली मिट्टी का उपयोग हाईवे निर्माण में किया जायेगा. इससे नदी के जल प्रवाह को बेहतर करने के साथ निर्माण कार्य में भी संसाधन का उपयोग हो सकेगा.

गया से गंगा तक बनेगा करीब 300 किमी का नदी कॉरिडोर

जीतन राम मांझी ने झारखंड के चतरा के बेलगड्डा स्थित फल्गु नदी के उद्गम स्थल से बिहार के गया जी होते हुए गंगा संगम तक करीब 300 किलोमीटर लंबे नदी कॉरिडोर के समग्र विकास का प्रस्ताव रखा. उन्होंने नदी के साथ परिक्रमा पथ विकसित करने का भी सुझाव दिया.

पिंडदान और बौद्ध श्रद्धालुओं को मिलेगा लाभ

बैठक में कहा गया कि फल्गु नदी करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और बौद्ध श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. गया जी में पिंडदान और बोधगया आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गर्मी के मौसम में भी स्वच्छ जल प्रवाह सुनिश्चित करना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है.

कैचमेंट क्षेत्र में चेक-डैम और भूजल रिचार्ज पर जोर

फल्गु नदी के जल प्रवाह को बनाए रखने के लिए कैचमेंट क्षेत्र में चेक-डैम निर्माण, आहर-पाइन के जीर्णोद्धार, भूजल पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की योजना तैयार की जायेगी. इससे नदी में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है.

आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ ने दिया वैज्ञानिक प्रेजेंटेशन

बैठक में आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर एएस मौर्य ने फल्गु नदी के पुनर्जीवन से जुड़ा वैज्ञानिक प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया. पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने योजना को त्वरित मंजूरी देने का भरोसा दिया, जबकि जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने तकनीकी सहयोग का आश्वासन दिया.

लंबे प्रयासों के बाद योजना को मिली बड़ी गति

फल्गु नदी को पुनर्जीवित करने की यह पहल नमामि निरंजना अभियान के संस्थापक संजय सज्जन सिंह के लंबे प्रयासों का परिणाम बतायी जा रही है. केंद्र की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद अब बिहार और झारखंड से एनओसी मिलने पर परियोजना के पहले चरण का काम आगे बढ़ने का रास्ता साफ होगा.

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By अश्विनी कुमार

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