Jehanabad News : जहानाबाद जिले में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है. बीते एक महीने के दौरान साइबर ठगों ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों के कई लोगों को निशाना बनाते हुए उनके बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से करीब 12 लाख रुपये की अवैध निकासी और ट्रांजैक्शन कर ली. ठगी का शिकार हुए लोगों ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज करायी है. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामलों की जांच शुरू कर दी है.
यूपीआई से रकम ट्रांसफर, क्रेडिट कार्ड से खरीदारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए अलग-अलग तरीके अपनाये. कहीं यूपीआई के माध्यम से खातों से रकम ट्रांसफर की गयी, तो कहीं क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर खरीदारी और अन्य ट्रांजैक्शन किये गये. इसके अलावा डीलरशिप दिलाने और खिलौने खरीदने के नाम पर भी लोगों से साइबर ठगी की गयी.
कई लोगों के खातों से हजारों की निकासी
सेवनन गांव निवासी रौशन कुमार के बैंक खाते से साइबर अपराधियों ने यूपीआई के माध्यम से करीब 96 हजार रुपये का ट्रांजैक्शन कर लिया. इसी तरह निसरपुरा निवासी अभिषेक कुमार के खाते से करीब 90 हजार रुपये की साइबर ठगी की गयी.
शकूराबाद थाना क्षेत्र के जानकी कुंज निवासी कुंदन कुमार के क्रेडिट कार्ड से करीब 57 हजार रुपये का फ्रॉड किया गया. घोसी थाना क्षेत्र के मिल्की निवासी पवन कुमार के क्रेडिट कार्ड से करीब 35,800 रुपये का ट्रांजैक्शन किया गया. वहीं मदनगंज निवासी अयोध्या प्रसाद के खाते से खिलौने खरीदने के नाम पर 57,711 रुपये की ठगी कर ली गयी.
पति-पत्नी के खातों से भी उड़ाये 1.09 लाख
काको थाना क्षेत्र के हाजीपुर निवासी अविनाश कुमार और उनकी पत्नी के खातों से यूपीआई के माध्यम से करीब 1.09 लाख रुपये का साइबर फ्रॉड किया गया. खातों से रकम निकाले जाने के बाद दोनों ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज करायी.
डीलरशिप के नाम पर 7.55 लाख की सबसे बड़ी ठगी
सबसे बड़ी ठगी का मामला नगर थाना क्षेत्र के मलहचक मोड़ निवासी बैजू कुमार से जुड़ा है. साइबर अपराधियों ने अथर्व डीलरशिप दिलाने के नाम पर उनसे करीब 7.55 लाख रुपये की ठगी कर ली. इतनी बड़ी रकम गंवाने के बाद पीड़ित ने साइबर थाना में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है.
बैंकिंग और यूपीआई ट्रांजैक्शन की जांच
एक महीने में अलग-अलग मामलों में लाखों रुपये की साइबर ठगी सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गयी है. पुलिस का कहना है कि सभी शिकायतों की जांच की जा रही है. जिन बैंक खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी जुटायी जा रही है. साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए बैंकिंग ट्रांजैक्शन, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है.
ओटीपी और यूपीआई पिन साझा करने से बचें
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन या क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए. किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या लालच में आकर ऑनलाइन भुगतान करने से पहले उसकी पूरी तरह जांच करना जरूरी है.
