मोदनगंज : प्रखंड क्षेत्र के दयालू स्थान परियांवा में यज्ञ के चौथे दिन शिव कथा में सुरेश चंद्र शास्त्री जी ने कहा कि अभियान से लोगों की बुद्धि विवेक सहित अन्य कई चीजों का नाश हो जाता है. उन्होंने कहा कि एक बार देवर्षि नारद को भी अभिमान हो गया था कि उन्होंने कामदेव पर विजय प्राप्त कर लिया है. उन्होंने कामदेव पर विजय प्राप्त की बात ब्रह्मा, शिव एवं विष्णु से बतायी. तब भगवान विष्णु ने अपनी माया से एक नगर का निर्माण करवाया. जिसका राजा शिशनिधि था.
उसकी कन्या अत्यंत सुंदरी थी. नारद जी ने उस नगर में प्रवेश किया . राजा शिशनिधि ने नारद को स्वयंवर में आने का न्योता दिया. नारद जी उसकी कन्या को देखकर मोहित हो गये. उनके मन में विवाह की कामना जागने लगी. उन्होंने श्री हरि के समक्ष जाकर स्वयंवर में जाने की आज्ञा मांगी. श्री हरि ने बानर का रूप नारद जी को दे दिया. नारद जी जब स्वयं में आये तो उनका रूप देखकर लोग मूंह फेर रहे थे .जब नारद ने ऐसा कि देखा तो आइने में अपना रूप देखकर श्री हरि शाप दे बैठे़ अर्थात जीवन में कभी भी किसी समय अभिमान नहीं करना चाहिए.
