अंधकार में रहता है आधा हिस्सा

समस्या . एनएच पर लगायी गयी 70 से अधिक एलइडी लाइटें हैं खराब एक माह पूर्व पोल में ट्रक से धक्का लगने के बाद से उभरी है समस्या जहानाबाद : शहर से गुजरने वाले एनएच 83 का एक बड़ा हिस्सा अंधकार डूबा है. एक महीने से एनएच 83 पर अंधेरा कायम है. कारण बड़ी संख्या […]

समस्या . एनएच पर लगायी गयी 70 से अधिक एलइडी लाइटें हैं खराब

एक माह पूर्व पोल में ट्रक से धक्का लगने के बाद से उभरी है समस्या
जहानाबाद : शहर से गुजरने वाले एनएच 83 का एक बड़ा हिस्सा अंधकार डूबा है. एक महीने से एनएच 83 पर अंधेरा कायम है. कारण बड़ी संख्या में एलइडी लाइटों का खराब होना. एनएच पर अंधेरा रहने से रात के समय उधर से गुजरने वाले लोगों में डर बना रहता है. जिस एजेंसी को लाइटें लगाने की जिम्मेवारी दी गयी थी उसका इस ओर कोई ध्यान नहीं है. बुडको को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया था. उसके पास सुधार के लिए पत्राचार भी किया गया, लेकिन कोई असर नहीं पड़ रहा है. यह कोई नयी बात नहीं है पहले भी कंपनी अपने दायित्वों का निर्वहन करने में लापरवाही बरतती रही है. परिणाम यह हो रहा है कि रोशनी मुहैया कराने के उद्देश्य से शहर में लगायी गयी एलइडी लाइटों का लाभ आम लोगों को समुचित ढंग से नहीं मिल रहा है.
ट्रक से पोल में धक्का लगने से खराब पड़ी है लाइटें: बताया गया है कि गौतम बुद्ध इंटर स्कूल के समीप एक माह पूर्व लाइट लगी एक पोल में ट्रक से धक्का लग गया था. इस कारण सड़क के एक छोर की लाइटें बेकार हो गयी. तकनीकी खराबी के कारण उससे रोशनी नहीं मिलती. 70 से अधिक लाइटें खराब होकर शोभा की वस्तु बनी है. उंटा मोड़ से लेकर अरवल मोड़ और बतीस भंवरिया से अंबेदकर चौक तक की लाइटें बेकार पड़ी हैं. उधर गांधी मैदान का इलाका भी शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है. उक्त इलाके के भी लाइटें खराब पड़ी हैं.
कार्यकारी एजेंसी वुडको पर है मेंटेनेंस का जिम्मा
एक करोड़ छह लाख की लागत से लगी थी 125 लाइटें
जिलाधिकारी आवास से अम्बेदकर चौक तक एनएच 83 के दोनों किनारे पर 125 लाइटें करीब डेढ़ साल पूर्व में लगायी गयी थी. हालांकि शहर के कुछ प्रमुख स्थानों को इससे अछूता रखा गया. लाइटों को मेंटेन रखने की जिम्मेवारी अभी बुडकों की है. चूंकि इसी एजेंसी ने शहर का सौंदर्यीकरण के साथ-साथ रोशनी की सुविधा बहाल करने के लिए लाइटें लगायी गयी थी. पोल के साथ लगायी गयी एक लाइट की कीमत करीब 85 हजार रुपये है. इस हिसाब से लगायी गयी 125 लाइटों पर एक करोड़ छह लाख 25 हजार रुपये खर्च किया गया. लेकिन लोगों को नियमित ढंग से रोशनी की सुविधा नहीं मिली. लगाये जाने के कुछ ही दिनों के बाद से लाइटें तकनीकी गड़बड़ी के कारण खराब होने लगी. हालांकि नगर पर्षद ने दशहरा, दीपावली समेत अन्य मौकों पर उसे दुरुस्त कर रोशनी की व्यवस्था करने का काम किया था.
फॉल्ट की जांच करा दूर की जायेगी गड़बड़ी
लगायी गयी एलइडी लाइटों के मेंटेनेंस की जिम्मेवारी अभी बुडको की है. उनके पास कई पत्राचार किये गये हैं जिसे गंभीरता से नहीं लिया गया. पूर्व में भी नगर पर्षद द्वारा खराब एलइडी लाइटों को ठीक कराया गया था. अभी बंद पड़ी लाइटों को ठीक करने के लिए फॉल्ट की जांच शीघ्र करायी जायेगी और गड़बड़ी दूर कर सड़क पर रोशनी की सुविधा बहाल की जायेगी .
अरुण कुमार, उपमुख्य पार्षद, नगर पर्षद

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