पुनर्वास केंद्र खुद अपाहिज अनदेखी . 2004 में सदर अस्पताल में बना था विकलांग केंद्र

जहानाबाद नगर : वर्ष 2004 में सदर अस्पताल परिसर में जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गयी थी. विकलांगों को बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करने और उनका पुनर्वास करने के उद्देश्य से स्थापित इस केंद्र में 2007 तक बेहतर तरीके से विकलांगों का इलाज हुआ और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करायी गयी. लेकिन […]

जहानाबाद नगर : वर्ष 2004 में सदर अस्पताल परिसर में जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गयी थी. विकलांगों को बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करने और उनका पुनर्वास करने के उद्देश्य से स्थापित इस केंद्र में 2007 तक बेहतर तरीके से विकलांगों का इलाज हुआ और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करायी गयी. लेकिन 2007 के बाद इस केंद्र की स्थिति बिगड़ने लगी. अब इस केंद्र में लगे उपकरण पूरी तरह बेकार हो गये हैं, वहीं कर्मियों के अभाव में यहां इलाज कराने आने वाले विकलांगों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल रहा है. जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र पूरे प्रदेश में एक मॉडल केंद्र के रूप में जिले में संचालित था.

अपना भवन में संचालित होने वाला इस केंद्र में आरंभ के दिनों में प्रति दिन 30 से 40 विकलांगों को फिजियोथेरेपी की सुविधा प्रदान की जाती थी. यहां पूरे दिन मरीजों का भीड़ लगी रहती थी. कर्मी भी पूरी ईमानदारी एवं तनमयता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया करते थे. 2007 में इस केंद्र को बिहार सरकार को हैंड ओवर का दिया गया.

इससे पूर्व यह केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधिन संचालित होता था. 2007 में जब यह केंद्र बिहार सरकार को हैंड ओवर हो गया उसके बाद से इस केंद्र के पतन की कहानी आरंभ हो गयी. केंद्र के शुरुआती दिनों में यहां 15 कर्मी कार्यरत थे. सभी कर्मी सर्वशिक्षा अभियान के थे जिन्हें यहां डेपोटेशन पर लाया गया था. लेकिन 2007 के बाद जब इस केंद्र को मिलने वाला डीआरएस फंड नहीं मिलने लगा तो कर्मियों के समक्ष भी वेतन के लाले पड़ने लगे. इसके बाद कई कर्मी अपना डिपोटेशन समाप्त करा लिये. वहीं कुछ कर्मी यहां से अन्यत्र तबादला करा लिये. फिलहाल इस केंद्र में सिर्फ चार कर्मी कार्यरत हैं जो उपकरणों के अभाव में भी मरीजों की सेवा करने में जुटे हुए हैं. इस केंद्र में फिजियोथेरेपी एवं अन्य सुविधा के लिए आने वाले मरीजों को अब अन्यत्र भेजा जाता है. यहां लगे लगभग सभी उपकरण बेकार हो गये हैं. फंड के अभाव में उपकरणों की मरम्मत नहीं होने के कारण उपकरण बेकार पड़े हैं.

विकलांगों के लिए था सभी प्रकार की सुविधाएं : इस केंद्र में सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध थी. फिजियोथेरेपी के साथ ही अन्य एडीप योजनाओं का लाभ विकलांगों को उपलब्ध कराया जाता था. लेकिन 2007 के बाद जब फंड मिलना बंद हो गया तो धीरे-धीरे सुविधाएं भी कम होने लगी. अब इस केंद्र का समुचित लाभ विकलांगों को नहीं मिल पा रहा है. शुरुआती दिनों में सभी प्रकार के विकलांगों के लिए यहां सुविधाएं उपलब्ध थी तथा उनका इलाज होता था. फिलहाल केंद्र में सुविधाओं की कमी के कारण मरीज भी आना नहीं चाहते हैं.
संचालन के लिए सरकार को लिखा है पत्र
केंद्र का बेहतर ढंग से संचालन के लिए सरकार से पत्राचार किया गया है. फंड उपलब्ध होते ही उपकरणों की मरम्मत तथा नये उपकरण की खरीद की जायेगी. विकलांगों के पुनर्वास के लिए बुनियादी केंद्र खोला जा रहा है. इसकी शुरुआत शीघ्र ही करा दिया जायेगा
श्रुतिदेव नारायण, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग

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