तेजी से गिर रहा भू-जल स्तर, मचा हाहाकार

जहानाबाद : जल है तो कल है. जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. बढ़ती आबादी के कारण जल की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है. पेयजल और सिंचाई के लिए भूमिगत जल का खूब उपयोग हो रहा है. इसके कारण भू-जल के स्तर में खतरनाक गिरावट देखने को मिल रही है. जिले […]

जहानाबाद : जल है तो कल है. जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. बढ़ती आबादी के कारण जल की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है. पेयजल और सिंचाई के लिए भूमिगत जल का खूब उपयोग हो रहा है. इसके कारण भू-जल के स्तर में खतरनाक गिरावट देखने को मिल रही है.

जिले के 93 पंचायतों के 581 गांवों में पहले तालाब और आहरों की बहुत संख्या होती थी. आंकड़ों के अनुसार करीब 13 हजार छोटे-बड़े तालाब, आहर और पइन थे, लेकिन अब इनमें से अधिकांश सिर्फ कागजों पर रह गये हैं.
बदलते समय के साथ लोगों में धन-संपत्ति का लालच भी बढ़ा जिसने तालाबों को नष्ट करने का काम किया. लोगों ने तालाबों को पाटकर मकान बना डालें या पइन, आहरों को अतिक्रमित कर खेती शुरू कर दी. इन तालाबों के पानी के रिस-रिस कर भू-जल तक पहुंचने से भूमिगत जल रिचार्ज होते रहता था, जिससे जलस्तर घटता नहीं था, लेकिन इन ताल-तलैयों के गायब होने से भूमिगत जल का रिचार्ज होना बंद हो गया.
खेती और पेयजल के लिए बोरिंग, समरसेबल, ट्यूबबेल के माध्यम से भूमिगत जल का लगातार दोहन किया जा रहा है. कुएं सुख गये हैं, वहीं गांव में हैंडपंपों ने भी पानी देना बंद कर दिया है. जिले के अधिकांश गांवों में पानी की कमी से जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी है, जिससे लोगों में हाहाकार मच रहा है. जिले से होकर गुजरने वाली नदियों में भी अब पानी नहीं आता है, जिससे नदी किनारे के पेड़ भी सूख रहे हैं.
जिले में आंकड़ों के अनुसार वर्ष में औसत 1050 मिमी वार्षिक वर्षा रिकॉर्ड की जाती है. एक दशक पहले गर्मी के दिनों से भूमिगत जल का औसत स्तर करीब 40 फुट हुआ करता था. वहीं बरसात के बाद यह स्तर बढ़कर 30 फुट हो जाता था, लेकिन अब यह जलस्तर गिरकर औसत 80 फुट का हो गया है. जो बरसात के बाद करीब 60-70 फुट तक ही उठ पाता है.
जिले में 41 हजार ट्यूबबेल, बोरिंग, बोरबेल्स के द्वारा 93 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की जाती है और करीब 13 लाख की आबादी पेयजल और अन्य कार्यों के लिए भूमिगत जल पर ही निर्भर है. अगर भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए फौरी कदम नहीं उठाये गये तो वो दिन दूर नहीं जब जिले के अधिकांश भूमि बंजर हो जायेगी और पीने के पानी के लिए चारों तरफ हाहाकार मचा रहेगा.

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