खोवा से निर्मित तिलकुट बना है लोगों की पहली पसंद

मकर संक्रांति पर्व को लेकर शहर के बाजारों में तिलकुट की दुकानें सज गयी हैं. बाजार में सौ से अधिक तिलकुट के अस्थायी खुदरा दुकान सज गये हैं.

By PANKAJ KUMAR SINGH | January 13, 2026 9:06 PM

जमुई . मकर संक्रांति पर्व को लेकर शहर के बाजारों में तिलकुट की दुकानें सज गयी हैं. बाजार में सौ से अधिक तिलकुट के अस्थायी खुदरा दुकान सज गये हैं. लोकल कारोबारी शंकर प्रसाद गुप्ता तथा काली चरण बताते हैं कि पहले तो मांग का अंदाजा नहीं लगता है, पर मकर संक्रांति के दो दिन पहले से अचानक आर्डर आने लगते हैं. इस स्थिति में कारोबार की साख बनाये रखने के लिए बाहर से भी माल मंगाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि सीजन में लोकल मेड तिलकुट करीब पंद्रह सौ क्विंटल बिक जाता है. लेकिन बाहर से मंगाये गये तिल के आइटम का आकलन किया जाये, तो जमुई और आसपास के बाजार में लगभग की तीन सौ क्विंटल से अधिक तिलकुट की खपत हो जाती है. तिलकुट के थोक कारोबारियों ने बताया कि बाजार में खोवा का तिलकुट सबसे महंगा बिक रहा है. इसकी मांग भी अपेक्षा से ज्यादा है. वैसे चीनी व गुड़ कि तिलकुट की भी मांग कम नहीं है. लेकिन लोगों की पहली पसंद खोवा तिलकुट है. ऐसे भी लोग हैं जो में दोनों की खरीदारी करते हैं.

विदेशों में भी है जमुई के तिलकुट की मांग

जमुई में निर्मित तिलकुट विदेशों में भी धूम मचा रहा है. जिले में निर्मित तिलकुट की मांग देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी है. तिलकुट बिक्रेता माखन भोग के प्रोपराइटर गुड़िया भालोटिया सहित प्रदीप भाई, शंकर कुमार, सागर केशरी, अशोक गुप्ता, माखनभोग सहित अन्य दुकानदारों ने बताया कि यहां कि तिलकुट दुबई, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश सहित अन्य देशों में भी भेजा जाता है. दुकानदारों ने बताया कि जिले वासियों के रिश्तेदार विदेशों में रहते हैं, इसलिए तिलकुट का मौसम आते ही तिलकुट का पार्सल भेजा जाता है.

उपलब्ध है कई प्रकार के तिलकुट

तिलकुट के अलग-अलग रूप रंग बाजार में नजर आ रहे हैं. यहां एक तिल से बनाये गये तिलकुट के अलग-अलग रूप और रंग है. तिल अलग बिक रहे हैं तो तिलकुट अलग. हालांकि की मांग तिल से बनाये गये आइटम की ज्यादा है. इनमें खासतौर पर तिलपापड़ी, तिलपट्टी, बदामपट्टी, मस्का लोगों को आकर्षित कर रहा है. लेकिन खोवा से बने तिलकुट सबकी पहली पसंद बनी है.

तिल व गुड़ संग कतरनी चूड़े की भी रहती है मांग

मकर संक्रांति के पर्व पर तिल के संग कतरनी चूड़ा की भी मांग शहर में बढ़ जाती है. शहर के किराना दुकानदारों की माने तो मकर संक्रांति के समय प्लेन चूड़ा सहित कतरनी चूड़ा की डिमांड बढ़ जाती है.

ठंड में तिल का सेवन स्वास्थ्य के लिये होता है लाभदायक

ठंड के मौसम में तिल का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ अंशुल अनुराग ने बताया कि तिल के बीज में विटामिन ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने का कार्य करता है. तिल के बीज स्वस्थ वसा का भी एक अच्छा स्रोत हैं, जिसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा शामिल हैं. ये वसा त्वचा के स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो सर्दियों के दौरान विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं. साथ ही ठंड के दौरान सामान्य सर्दी और बीमारियों से बचने के लिए तिल प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने बताया कि तिल और गुड़ खाने का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि जब सर्दियों में शरीर का तापमान गिर जाता है ऐसे में हमें बाहरी तापमान से अंदरुनी तापमान को बैलेंस करना पड़ता है. तिल और गुड़ गर्म होते हैं और इन्हे खाने से शरीर में गर्माहट आती है. तिल में विटामिन, मिनरल्स, कैल्शियम, आयरन, मैग्निशियम, फाइबर, कॉपर, जिंक, प्रोटीन इत्यादि पोषक तत्व पाए जाते हैं जो कई बीमारियों को दूर करने में मददगार साबित होता है.

तिलकुट के दाम पर एक नजर

चीनी की तिलकुट- 320 रुपये प्रति किलो

गुड़ की तिलकुट – 320 रुपये प्रति किलोकेशर पिस्ता तिलकुट – 300 रुपये प्रति किलो खोवा तिलकुट – 480 रुपये प्रति किलो खोवा केशर तिलकुट – 480 रुपये प्रति किलो तिलकतरी – 320 रुपये प्रति किलो घीवर – 500 रुपये प्रति किलो तिल रबड़ी – 320 रुपये प्रति किलोबदाम चक्की – 340 रुपये प्रति किलो

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