आंगनबाड़ी केंद्रों में ग्रीष्मावकाश नहीं, चिलचिलाती धूप में केंद्र पहुंचने को विवश नौनिहाल

बाल विकास परियोजना के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले छोटे बच्चों को अब तक ग्रीष्मकालीन अवकाश नहीं दिया गया है.

प्रतिनिधि, खैरा बाल विकास परियोजना के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले छोटे बच्चों को अब तक ग्रीष्मकालीन अवकाश नहीं दिया गया है. जहां एक ओर निजी विद्यालयों में एक सप्ताह पहले ही छुट्टी घोषित कर दी गयी, वहीं सरकारी विद्यालयों में भी 2 जून से गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं. इसके बावजूद तीन से छह वर्ष तक के बच्चे आज भी उमस भरी गर्मी और तेज धूप में आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचने को मजबूर हैं. यह स्थिति शहरी हो या ग्रामीण, हर क्षेत्र में एक जैसी बनी हुई है. सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक इन मासूम बच्चों को केंद्रों में रहना पड़ता है, जबकि तापमान प्रातःकाल से ही 40 डिग्री के आसपास पहुंचने लगता है. जेपी सेनानी संघ के जिलाध्यक्ष शिवनंदन सिंह, जेपी सेनानी सियाराम मंडल, समाजसेवी साकिन्द्र सिंह, जयप्रकाश रावत सहित अन्य लोगों ने सरकार की इस दोहरी नीति पर गहरी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि इन नौनिहालों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है. जहां बड़े बच्चों को आराम मिल रहा है, वहीं छोटे बच्चों को भीषण गर्मी में भी केंद्र भेजा जाना अमानवीय है. इन लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी तत्काल ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया जाए. उन्होंने कहा कि जब बड़े बच्चों के लिए अवकाश जरूरी समझा गया है, तो इन मासूमों के लिए क्यों नहीं? छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्रों को शीघ्र बंद किया जाना चाहिए.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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