घालमेल : कागज पर खोद दिया आहर, जमीन पर आज भी हो रही खेती, गोपालपुर में बड़ी अनियमितता

Jamui News:खैरा प्रखंड की गोपालपुर पंचायत में मनरेगा के तहत कागजों पर आहर खुदाई दिखाकर लाखों रुपये निकासी का आरोप लगा है, जबकि स्थल पर खेत मौजूद हैं.

मनरेगा की लाखों रुपये की योजना पर उठे गंभीर सवाल घनबेरिया में जल संरक्षण कार्य के नाम पर लाखों की निकासी स्थल पर नहीं मिला आहर का अस्तित्व, खेत में हो रही खेती जमुई.सरकार गांवों में जल संरक्षण, भू-जल स्तर सुधार और किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा के तहत हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन खैरा प्रखंड की गोपालपुर पंचायत में एक ऐसी योजना सामने आई है, जिसने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घनबेरिया गांव में मनरेगा के तहत जिस आहर की खुदाई का कार्य कागजों पर पूर्ण दिखाया गया है, वहां आज भी खेत मौजूद हैं और खेती की जा रही है। आरोप है कि बिना खुदाई कराए ही लाखों रुपये की निकासी कर योजना को पूर्ण घोषित कर दिया गया। इसके बाद पंचायत में संचालित मनरेगा योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। जल संरक्षण योजना पर उठे सवाल जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में जल संरक्षण एवं जल संग्रहण के उद्देश्य से घनबेरिया गांव में पुलिया आहर की खुदाई योजना को स्वीकृति दी गई थी। इस योजना का वर्क कोड 0550008015/WC/20633824 है। योजना के लिए कुल 4.72 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। अभिलेखों के अनुसार कार्य 7 मई 2024 को शुरू हुआ और 8 अप्रैल 2025 को पूर्ण दर्शा दिया गया। रिकॉर्ड में 1418 मजदूरों द्वारा कार्य किए जाने का उल्लेख है। वहीं मजदूरी समेत विभिन्न मदों में 3 लाख 43 हजार 507 रुपये की राशि निकासी किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि स्थल की वर्तमान स्थिति रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। केवल झाड़ियों की सफाई कर पूरा दिखाया काम ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में इतने मजदूरों ने लंबे समय तक कार्य किया होता, तो उसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता। उनका आरोप है कि केवल घास और झाड़ियों की सफाई कर योजना को पूर्ण दिखा दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार जिस भूमि को आहर बताया गया है, वहां आज भी नियमित रूप से खेती की जा रही है। खेत की स्थिति देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वहां कभी जल संरक्षण से जुड़ा कोई बड़ा निर्माण या खुदाई कार्य हुआ हो। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आहर का निर्माण हुआ होता, तो किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलती और वर्षा जल का संरक्षण संभव होता। जांच और कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना को कागजों पर पूर्ण दिखाकर सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया है और पंचायत स्तर पर गंभीर अनियमितता हुई है। लोगों ने संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, मनरेगा विभाग और संबंधित अधिकारियों से योजना स्थल का भौतिक सत्यापन कराने, खर्च की गई राशि की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच होने पर पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

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