चॉकलेट समझकर खा ली सल्फास की गोली, 12 साल की किशोरी की मौत; तीन सहेलियां जिंदगी के लिए लड़ रहीं जंग
Jamui News : एक छोटी सी भूल ने चार मासूम सहेलियों की जिंदगी बदल दी. सड़क किनारे पड़ी सल्फास की गोली को चॉकलेट समझकर खा लेने से एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसकी तीन सहेलियां अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं. इस दर्दनाक घटना ने पूरे गांव को गम और सवालों से भर दिया है.
जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट
Jamui News : जमुई जिले के खैरा प्रखंड एक गांव में हुई एक हृदयविदारक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. घास काटने गई चार मासूम बच्चियों ने सड़क किनारे पड़ी सल्फास की गोली को चॉकलेट समझकर आपस में बांटकर खा लिया. कुछ ही घंटों में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. इलाज के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चियां गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं.
बहियार गयी थीं चारों सहेलियां
परिजनों के अनुसार शुक्रवार को स्कूल से लौटने के बाद चारों बच्चियां घास काटने के लिए बहियार गई थीं. गम्हरिया गांव के समीप एक पुल के पास बैठने के दौरान उनकी नजर कागज में लिपटी एक गोली पर पड़ी. मासूम बच्चियां उसे चॉकलेट समझ बैठीं और उसे आपस में बराबर बांटकर खा लिया.
घर पहुंचते ही बिगड़ने लगी तबीयत
गोली खाने के बाद सभी बच्चियां अपने-अपने घर लौट गईं. शाम होते-होते उन्हें उल्टी, बेचैनी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगीं. परिजनों ने जब कारण जानने की कोशिश की तो बच्चियों ने सड़क किनारे मिली गोली खाने की बात बताई. इसके बाद परिवार के लोग घबरा गए और आनन-फानन में सभी को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले गए.
इलाज के दौरान बुझ गई एक मासूम जिंदगी
अस्पताल में भर्ती चारों बच्चियों का इलाज शुरू किया गया, लेकिन 12 वर्षीय एक किशोरी की हालत लगातार बिगड़ती चली गई. चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर किया, मगर अस्पताल ले जाने के दौरान ही उसकी मौत हो गई. किशोरी सातवीं कक्षा में पढ़ती थी.
तीन बच्चियों की हालत अब भी गंभीर
घटना में गंभीर रूप से बीमार बच्चियों में 13 वर्षीय और 11 वर्षीय किशोरी शामिल हैं. तीनों का इलाज जारी है और उनकी हालत चिंताजनक बतायी जा रही है. सभी छात्राएं उत्क्रमित मध्य विद्यालय, गम्हरिया की छात्रा हैं.
गांव में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
संजना की मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम छा गया. मृतक बच्ची के घर में कोहराम मच गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं.
जहरीले कीटनाशकों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने जहरीले कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग और निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि सल्फास जैसी खतरनाक दवा को खुले में नहीं फेंका गया होता तो एक मासूम की जान नहीं जाती और तीन अन्य बच्चियां अस्पताल में जिंदगी की जंग नहीं लड़ रहीं होतीं.
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. साथ ही जहरीले रसायनों और कीटनाशकों के सुरक्षित निस्तारण को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.