पति की मौत के बाद नहीं टूटी मंगली, मजदूरी कर पाले तीन बच्चे, छह साल बाद लोक शिकायत से मिला चार लाख का सहारा

पति की मृत्यु के बाद मंगली देवी ने मजदूरी को सहारा बनाकर तीन बच्चों की परवरिश की. छह साल तक सरकारी सहायता के लिए भटकने के बाद, जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में आवेदन करने पर उन्हें चार लाख रुपये की आपदा सहायता राशि मिली.

पति की मौत के बाद जिंदगी ने मंगली देवी के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया. सिर से पति का साया उठ गया, तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गयी और रहने के लिए झोपड़ी के अलावा कुछ नहीं था. लेकिन जमुई प्रखंड क्षेत्र के अंबा गांव की मंगली हालात के आगे नहीं टूटीं. उन्होंने मजदूरी को सहारा बनाया और दो बेटियों व एक बेटे की परवरिश में जुट गयीं.

करीब छह साल तक सरकारी सहायता के लिए अस्पताल से लेकर थाना, अंचल कार्यालय और कचहरी तक दौड़ती रहीं. कई बार उम्मीद टूटी, लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखा. आखिरकार जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में एक आवेदन के बाद उनकी फरियाद सुनी गयी और चार लाख रुपये की आपदा सहायता राशि उनके खाते में पहुंची.

नहर में डूबने से हुई थी पति की मौत

वर्ष 2020 में मंगली देवी के पति सुंदर मांझी की गांव की नहर में डूबने से मौत हो गयी थी. पति के चले जाने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी मंगली के ऊपर आ गयी. घर में छोटे बच्चे थे और आमदनी का कोई स्थायी साधन नहीं था.

ऐसे मुश्किल वक्त में मंगली ने मजदूरी शुरू की. दिनभर मेहनत कर बच्चों का पेट भरा और उनकी पढ़ाई-लिखाई व परवरिश की जिम्मेदारी संभाली. बाद में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला तो झोपड़ी की जगह किसी तरह पक्का घर भी बन सका.

छह साल तक दफ्तरों की चौखट पर भटकती रहीं

पति की डूबने से मौत के बाद मिलने वाली चार लाख रुपये की सरकारी सहायता के लिए मंगली ने कई बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाए. उनका कहना है कि वह पढ़ी-लिखी नहीं हैं और कागजी प्रक्रिया पूरी कराने में उन्हें काफी परेशानी हुई.

मंगली के अनुसार, कागज आगे बढ़ाने के नाम पर उनसे पैसे की जरूरत बतायी जाती थी. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह पैसे का इंतजाम नहीं कर सकीं. देखते ही देखते छह साल गुजर गये और उन्होंने सहायता मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी.

एक आवेदन ने बदल दी पूरी तस्वीर

करीब एक माह पहले किसी व्यक्ति ने उन्हें जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में आवेदन देने की जानकारी दी. इसके बाद मंगली ने वहां आवेदन दिया. करीब छह दिनों बाद मामले की सुनवाई हुई और संबंधित दस्तावेजों की जांच करायी गयी.

जांच में सुंदर मांझी की पानी में डूबने से हुई मौत से संबंधित कागजात सही पाये गये. मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बालमुकुंद प्रसाद ने संबंधित विभाग से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये.

इसके बाद करीब 15 दिनों के भीतर मंगली देवी को सरकार और आपदा विभाग की ओर से चार लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करा दी गयी.

खाते में रुपये पहुंचे तो छलक उठीं आंखें

छह साल के इंतजार के बाद खाते में चार लाख रुपये आने की खबर मिली तो मंगली देवी की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे. वर्षों से जिस सहायता के लिए वह दफ्तरों की चौखट पर भटक रही थीं, आखिरकार वह राशि उनके खाते तक पहुंच गयी.

मंगली की बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बेटी और बेटा अभी उनके साथ रहते हैं. उन्होंने जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बालमुकुंद प्रसाद के प्रति आभार जताते हुए कहा कि कई जगह गुहार लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, लेकिन लोक शिकायत में आवेदन देने के बाद उनकी परेशानी दूर हुई.

छह साल के संघर्ष की कहानी है मंगली की जिंदगी

जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बालमुकुंद प्रसाद ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद दस्तावेजों की जांच करायी गयी. मामला सही पाये जाने के बाद संबंधित विभाग से समन्वय कर महिला को सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि उपलब्ध करायी गयी.

मंगली की कहानी सिर्फ चार लाख रुपये मिलने की कहानी नहीं है. यह उस मां के छह साल लंबे संघर्ष की दास्तान है, जिसने पति की मौत के बाद टूटने के बजाय मजदूरी को सहारा बनाया, तीन बच्चों को संभाला और सरकारी मदद की उम्मीद भी नहीं छोड़ी.

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By Rahul Kumar Singh

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