पुणे में हादसा, झाझा में मातम: 21 साल के सौरभ की मौत, गांव के 35 युवाओं ने संभाली मदद की जिम्मेदारी

पुणे में हुए रेल हादसे में 21 वर्षीय सौरभ कुमार की मौत से उनके पैतृक गांव झाझा में मातम पसर गया है. इस मुश्किल घड़ी में पुणे और आसपास के युवाओं ने आगे आकर पीड़ित परिवार को सहारा दिया है.

Pune Rail Accident: पुणे से आयी एक खबर ने जमुई के झाझा प्रखंड के खैरन गांव में रविवार को मातम पसार दिया. गांव निवासी मथुरा यादव के छोटे पुत्र 21 वर्षीय सौरभ कुमार की पुणे में हुए रेल हादसे में मौत हो गयी. गंभीर रूप से घायल सौरभ को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया था, जहां करीब दो दिनों तक उनका इलाज चला. इलाज के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

रविवार को जैसे ही सौरभ की मौत की खबर गांव पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया. घर में चीख-पुकार मच गयी और देखते ही देखते पूरे गांव में शोक की लहर फैल गयी.

घर लौटते समय हादसे का हुए शिकार

परिजनों के अनुसार सौरभ रेल मार्ग से अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान पुणे में वह हादसे की चपेट में आ गये. दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आयीं.

स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज शुरू हुआ. परिजनों को उम्मीद थी कि सौरभ जल्द ठीक होकर घर लौटेंगे.

20 अगस्त की शाम तक उनकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा था. लेकिन इसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गयी. चिकित्सकों ने काफी प्रयास किया, लेकिन सौरभ की जान नहीं बचायी जा सकी.

मौत की खबर से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

सौरभ की मौत की सूचना मिलते ही खैरन गांव में शोक का माहौल बन गया. 21 साल की उम्र में परिवार के छोटे बेटे की मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया.

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं. जिस युवक के जल्द घर लौटने की उम्मीद परिवार कर रहा था, उसका पार्थिव शरीर अब घर पहुंचने वाला है.

पुणे में झाझा के युवाओं ने संभाला मोर्चा

सौरभ के निधन के बाद पुणे में रहने वाले झाझा क्षेत्र के प्रवासी युवाओं ने परिवार की मदद के लिए आगे आकर मानवता की मिसाल पेश की.

सौरभ के हादसे की जानकारी मिलने के बाद प्रवासी युवक अस्पताल पहुंचे. इलाज के दौरान उन्होंने परिजनों को हरसंभव सहयोग दिया. संकट की इस घड़ी में अनजान शहर में अपने क्षेत्र के युवाओं का साथ परिवार के लिए बड़ी मदद साबित हुआ.

गांव के 30-35 युवाओं ने जुटायी आर्थिक मदद

सिर्फ पुणे में रह रहे युवाओं ने ही नहीं, बल्कि खैरन और आसपास के गांवों के युवाओं ने भी सौरभ के इलाज में सहयोग किया.

करीब 30 से 35 युवाओं ने एकजुट होकर अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक मदद की. इलाज के दौरान परिवार को आर्थिक परेशानी न हो, इसके लिए युवाओं ने सहयोग किया.

अब इन युवाओं ने सौरभ के पार्थिव शरीर को पुणे से गांव तक लाने में होने वाले खर्च की पूरी जिम्मेदारी भी उठायी है.

सोमवार सुबह गांव पहुंचेगा पार्थिव शरीर

ग्रामीणों और युवाओं के सहयोग से सौरभ का पार्थिव शरीर एंबुलेंस से पुणे से खैरन गांव लाया जा रहा है. परिजनों के अनुसार सोमवार सुबह तक पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने की संभावना है.

पार्थिव शरीर के पहुंचने के बाद परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया जायेगा. गांव में सौरभ के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है.

जनप्रतिनिधियों ने परिजनों को बंधाया ढांढ़स

घटना की जानकारी मिलने के बाद बैजला पंचायत के मुखिया प्रकाश पंडित समेत अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण सौरभ के घर पहुंचे. उन्होंने शोकाकुल परिजनों को ढांढ़स बंधाया और दुख की इस घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया.

ग्रामीणों ने सौरभ की मौत को परिवार के लिए बड़ी क्षति बताते हुए प्रशासन और सरकार से मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है.

Pune Rail Accident: हादसे ने फिर सामने लायी प्रवासी परिवारों की मुश्किल

सौरभ की मौत ने एक बार फिर उन परिवारों की मुश्किल सामने ला दी है, जिनके युवा रोजगार या अन्य कारणों से दूसरे राज्यों में रहते हैं. हादसा किसी दूसरे शहर में होने पर परिवार को इलाज, आर्थिक मदद और पार्थिव शरीर को घर तक लाने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

ऐसे समय में स्थानीय युवाओं और प्रवासी संगठनों का सहयोग परिवार के लिए बड़ी राहत बनता है. सौरभ के मामले में भी झाझा के युवाओं ने जिस तरह एकजुट होकर परिवार की मदद की, वह सामाजिक एकजुटता की मिसाल बन गयी है.

फिलहाल पूरे खैरन गांव की निगाहें सोमवार सुबह का इंतजार कर रही हैं, जब सौरभ का पार्थिव शरीर अपने गांव पहुंचेगा.

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लेखक के बारे में

By ऋतांबर सिंह

ऋतांबर सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. झाझा (जमुई) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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