Jamui News: ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए जमुई में अब हर मंगलवार 'साइबर मंगलवार' अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के तहत लोगों को डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाएगा. राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद जिले में यह फैसला लिया गया है.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक
शुक्रवार को मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों के साथ साइबर अपराध की रोकथाम को लेकर समीक्षा बैठक की.
बैठक में जमुई के जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल भी शामिल हुए. इस दौरान साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण, त्वरित कार्रवाई और जनजागरूकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए.
हर मंगलवार लोगों को किया जाएगा जागरूक
बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी जिलों में प्रत्येक मंगलवार 'साइबर मंगलवार' अभियान चलाया जाएगा.
इस अभियान के तहत आम लोगों को डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन ठगी से बचाव, सुरक्षित डिजिटल लेनदेन और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी जाएगी. साथ ही साइबर अपराध समन्वय केंद्र को और अधिक मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया.
डीएम बोले- डिजिटल युग में सतर्कता सबसे बड़ा बचाव
बैठक के बाद जिलाधिकारी नवीन ने कहा कि डिजिटल युग में सुरक्षा की पहली शर्त स्वयं की सतर्कता है.
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों के डर और लालच का फायदा उठाते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध फोन कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज या लिंक पर बिना जांचे भरोसा नहीं करना चाहिए.
उन्होंने लोगों से अपने परिवार के बुजुर्गों और बच्चों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की.
ओटीपी, यूपीआई पिन और पासवर्ड किसी से साझा न करें
पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने कहा कि कोई भी बैंक अधिकारी फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी नहीं मांगता.
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि लॉटरी, बिजली बिल, बैंक खाता बंद होने या अन्य लालच देने वाले संदेशों में आए लिंक पर क्लिक न करें. केवल संबंधित संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर ही भरोसा करें.
Jamui News: साइबर ठगी होने पर तुरंत करें यह काम
अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या सरकारी साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं.
समय पर शिकायत मिलने पर बैंक खाते में भेजी गई राशि को फ्रीज कर पीड़ित को राहत दिलाने की संभावना बढ़ जाती है.
जीरो एफआईआर और सोशल मीडिया निगरानी पर भी जोर
बैठक में निर्देश दिया गया कि साइबर अपराध के मामलों में क्षेत्राधिकार के विवाद में पड़े बिना तत्काल जीरो एफआईआर दर्ज की जाए, ताकि जांच में देरी न हो.
इसके अलावा मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से पीड़ितों की राशि वापस दिलाने के प्रयास तेज करने, सोशल मीडिया पर अफवाह और आपत्तिजनक पोस्ट पर त्वरित कार्रवाई करने तथा सहयोग पोर्टल और समन्वय पोर्टल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए.
पुलिसकर्मियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए साइट्रेन पोर्टल के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण और चिन्हित साइबर हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया.
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