Jamui NDRF Mock Drill: जमुई में स्कूल में पढ़ाई के बीच अचानक भूकंप आ जाए, आग लग जाये या कोई बच्चा पानी में डूबने लगे तो उस वक्त घबराने के बजाय क्या करना चाहिए? ऐसी आपात स्थिति में सही फैसला कुछ सेकेंड में जिंदगी बचा सकता है. इसी सोच के साथ जमुई के दो विद्यालयों में मंगलवार को विद्यार्थियों और शिक्षकों को आपदा से निपटने की व्यवहारिक ट्रेनिंग दी गयी.
बिहार विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन के निर्देश पर 9वीं वाहिनी एनडीआरएफ की टीम ने बरहट प्रखंड के प्लस टू कृत्यानंद उच्च माध्यमिक विद्यालय, मलयपुर और प्लस टू प्रोजेक्ट कामिनी बालिका उच्च विद्यालय, बरहट में मॉक ड्रिल कराया. इस दौरान केवल आपदा के बारे में जानकारी नहीं दी गयी, बल्कि बच्चों और शिक्षकों को मौके पर बचाव के तरीके करके भी दिखाये गये.
अचानक आपदा आये तो सबसे पहले क्या करना है
आपदा के समय सबसे बड़ी चुनौती अक्सर डर और अफरातफरी होती है. स्कूल में एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहते हैं. ऐसे में भूकंप, आग या दूसरी आपदा की स्थिति में यदि सही तरीके से बाहर नहीं निकला गया, तो खतरा बढ़ सकता है.
एनडीआरएफ के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि आपदा के समय घबराने के बजाय धैर्य और सूझ-बूझ से काम लेना जरूरी है. सुरक्षित स्थान की पहचान, सही रास्ते से बाहर निकलना और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करना आपदा के दौरान बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है.
बच्चों को यह भी समझाया गया कि आपदा के समय छोटी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान कर सकती है. इसलिए स्कूल स्तर पर पहले से तैयारी और नियमित अभ्यास जरूरी है.
भूकंप, आग से लेकर वज्रपात तक की दी जानकारी
मॉक ड्रिल के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को कई तरह की आपदाओं से बचाव के उपाय बताये. इनमें भूकंप, अग्निकांड, वज्रपात, डूबने की घटना तथा लू और हीटवेव जैसी स्थितियां शामिल थीं.
भूकंप के दौरान सुरक्षित रहने, अग्निकांड की स्थिति में स्कूल से सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने और वज्रपात के दौरान जरूरी सावधानियां बरतने की जानकारी दी गयी.
इसी तरह डूबने की घटना और तेज गर्मी के दौरान होने वाली परेशानी से बचाव के तरीके भी समझाये गये. विशेषज्ञों ने बताया कि अलग-अलग आपदाओं में बचाव का तरीका भी अलग होता है. इसलिए बच्चों को केवल सामान्य सावधानी नहीं, बल्कि परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देना सीखना चाहिए.
सिर्फ समझाया नहीं, करके भी दिखाया
इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को केवल मौखिक जानकारी देने तक इसे सीमित नहीं रखा गया. आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान तक पहुंचने, विद्यालय भवन से सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने और प्राथमिक उपचार देने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया.
उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए बचाव कार्य कैसे किया जा सकता है, इसकी जानकारी भी दी गयी. इससे विद्यार्थियों को वास्तविक आपदा की स्थिति में सामने आने वाली चुनौतियों को समझने में मदद मिली.
ऐसी मॉक ड्रिल का उद्देश्य यही है कि संकट के समय बच्चों को यह सोचने में समय न गंवाना पड़े कि क्या करना है. नियमित अभ्यास से उन्हें सही प्रतिक्रिया देने का आत्मविश्वास मिल सकता है.
स्कूलों में क्यों जरूरी है ऐसी मॉक ड्रिल
स्कूलों में हर दिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शिक्षक मौजूद रहते हैं. किसी आपदा की स्थिति में उनकी सुरक्षा केवल प्रशासन या बचाव दल की जिम्मेदारी नहीं है. विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी बुनियादी सुरक्षा उपायों की जानकारी होना जरूरी है.
इसी वजह से विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को महत्व दिया जा रहा है. मॉक ड्रिल के जरिये विद्यार्थियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने के साथ-साथ पहले से तैयारी रखना भी उतना ही जरूरी है.
एक प्रशिक्षित विद्यार्थी आपात स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के साथ आसपास मौजूद दूसरे लोगों की मदद भी कर सकता है.
जिला प्रशासन लगातार करा रहा जागरूकता कार्यक्रम
जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि विद्यालयों में आपदा से बचाव को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल लगातार आयोजित किये जा रहे हैं. इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं और शिक्षण कर्मियों की आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है.
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि बच्चे आपदा के समय केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करने में भी सक्षम बनें.
मंगलवार को बरहट प्रखंड के दोनों विद्यालयों में हुए प्रशिक्षण को इसी व्यापक सुरक्षा अभियान का हिस्सा माना जा रहा है.
Jamui NDRF Mock Drill: सही जानकारी और समय पर फैसला बचा सकता है जान
एनडीआरएफ के प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि आपदा के समय घबराहट स्थिति को और गंभीर बना सकती है. इसके विपरीत सही जानकारी, धैर्य और समय पर लिया गया निर्णय जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है.
विद्यालयों में नियमित मॉक ड्रिल से बच्चों को आपात स्थिति के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही है. आने वाले समय में ऐसे अभ्यास जारी रहने से स्कूलों में आपदा प्रबंधन की तैयारी और मजबूत होने की उम्मीद है.
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