लोहे की मांसपेशियां व इस्पात की नसें से होगा राष्ट्र का निर्माण
राष्ट्रीय युवा सप्ताह (12 से 19 जनवरी 2026) के तहत मंगलवार को केकेएम कॉलेज में युवाओं की बौद्धिक प्रतिभा और विचार शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला.
जमुई . राष्ट्रीय युवा सप्ताह (12 से 19 जनवरी 2026) के तहत मंगलवार को केकेएम कॉलेज में युवाओं की बौद्धिक प्रतिभा और विचार शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला. कॉलेज की एनएसएस इकाई के तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद का राष्ट्र निर्माण में शारीरिक सुदृढ़ता का आह्वान: लोहे की मांसपेशियां, इस्पात की नसें विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. प्रतियोगिता का उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के उन विचारों को युवाओं तक पहुंचाना था, जिनमें उन्होंने राष्ट्र के उत्थान के लिए शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक दृढ़ता और अनुशासन को अनिवार्य बताया है. प्रतिभागियों ने अपने निबंधों के माध्यम से यह रेखांकित किया कि सशक्त शरीर और मजबूत मन ही सशक्त राष्ट्र की नींव होते हैं. स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध कथन लोहे की मांसपेशियां, इस्पात की नसें निबंधों का केंद्रीय भाव रहा. प्रतिभागियों ने अपने विचारों में फिटनेस संस्कृति के महत्व, मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका तथा युवाओं के सर्वांगीण विकास को समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बताया. निबंधों में यह भी उल्लेख किया गया कि आज के युवा यदि अनुशासन, आत्मबल और शारीरिक सुदृढ़ता को जीवन का हिस्सा बनाएं, तो राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इस अवसर पर केकेएम कॉलेज की एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सुदीप्ता मोंडल (भौतिकी विभाग) ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि युवा यदि शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बनें, तभी देश सशक्त और समृद्ध बन सकता है. निबंध लेखन प्रतियोगिता के कार्यक्रम समन्वयक डॉ अनिंद्य सुंदर पोले (अंग्रेज़ी विभाग) रहे. आयोजन को सफल बनाने में प्रो मो शफे दानिश (अंग्रेज़ी विभाग), प्रो कैलाश पंडित, डॉ श्वेता सिंह (हिंदी विभाग) ने सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई. कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय युवा सप्ताह के उद्देश्यों को साकार करते हुए युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरणा लेने तथा एक स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया.
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