गिद्धौर. हिंदू धर्म में अखंड सौभाग्य की कामना लिए पति की दीर्घायु का प्रतीक माने जाने वाले वट सावित्री व्रत पर शनिवार को गिद्धौर प्रखंड क्षेत्र में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, इस अवसर पर क्षेत्र के पतसंडा, गंगरा, कोल्हुआ, रतनपुर, कुंधुर, मौरा, सेवा, पूर्वी गुगलडीह आदी पंचायतों के दर्जनों गांवों में हजारों सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख समृद्धि की मंगलकामना की. पर्व को लेकर अहले सुबह से ही सभी पंचायतों के धार्मिक स्थलों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गयी. पूरे दिन श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा. मान्यता है कि जो स्त्री इस व्रत को सच्चे मन से करती है, उसके पति पर आने वाली सभी विपदाएं टल जाती हैं और दांपत्य जीवन शुखमय होता है.
क्या है धार्मिक महत्व
मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने तप, समर्पण और पतिव्रता धर्म से यमराज को प्रसन्न कर अपने मृत पति सत्यवान के प्राण ईश्वर से वापस प्राप्त किए थे, तभी से सुहागिन महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर बरगद के पेड़ में कच्चा धागा लपेटकर सात बार परिक्रमा कर पति के स्वस्थ्य जीवन की मंगलकामना के साथ ईश्वर से वरदान मांगा, बताते चलें कि बरगद को अक्षयवट कहा जाता है जो ब्रह्मा विष्णु और महेश का प्रतीक है और इसमें दीर्घायु का वास माना गया है.
पूजा विधि और उत्साह
सुबह से ही क्षेत्र भर की महिलाएं स्नान ध्यान कर मंदिरों-शिवालयों के पास स्थित वट वृक्ष के पास पूजा अर्चना को ले पहुंचीं, इधर मुख्यालय के पतसंडा पंचायत के पंच मंदिर प्रांगण में स्थित अति प्राचीन वट वृक्ष के निकट सैकड़ों महिलाओं ने फल, फूल, नैवेद्य अर्पित कर जल चढ़ाया और रक्षा सूत्र बांधा. महिलाओं ने वट सावित्री की कथा सुनी और पति की सलामती की प्रार्थना की.
