Jamui News: चकाई में बारिश की कमी से धान की खेती पर संकट गहराने लगा है. खेतों में नमी नहीं है और कई जगह रोपी गयी धान की फसल सूखने की स्थिति में पहुंच गयी है. इसे देखते हुए जन सुराज पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष सह पूर्व प्रत्याशी डॉ धर्मेंद्र सिन्हा ने सरकार से चकाई प्रखंड को अविलंब सुखाड़ क्षेत्र घोषित करने की मांग की है.
उन्होंने जिलाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी से क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का स्थल निरीक्षण कर किसानों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की है. डॉ सिन्हा का कहना है कि समय रहते सरकारी मदद नहीं मिली, तो किसानों की मुश्किल और बढ़ सकती है.
80 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर
डॉ धर्मेंद्र सिन्हा के अनुसार चकाई प्रखंड करीब 77,404.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. यहां 23 पंचायतें हैं और करीब 540 चिरागी तथा 100 बेचिरागी गांव हैं.
करीब तीन लाख की आबादी वाले प्रखंड में लगभग 80 प्रतिशत लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है. खासकर ग्रामीण इलाकों में किसानों की आर्थिक स्थिति काफी हद तक खरीफ फसल और धान के उत्पादन पर टिकी रहती है.
चकाई में अधिकांश खेती वर्षा जल पर आधारित है. ऐसे में पर्याप्त बारिश नहीं होने का सीधा असर खेतों और किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है.
घोरमो गांव में महज 15 फीसदी रोपनी का दावा
डॉ सिन्हा ने धान की रोपनी की स्थिति को लेकर चकाई पंचायत के घोरमो गांव का उदाहरण दिया. उनके अनुसार गांव में करीब 15 प्रतिशत ही धान की रोपनी हो सकी है.
जिन खेतों में धान की रोपनी हुई भी है, वहां पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसल सूखने की स्थिति में है. उनका कहना है कि यही स्थिति चकाई प्रखंड की अन्य पंचायतों के गांवों में भी देखने को मिल रही है.
धान की फसल के शुरुआती दौर में पानी की कमी किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गयी है. बारिश नहीं होने से खेतों में नमी बनाए रखना मुश्किल हो रहा है.
रोपनी के आंकड़े पर भी उठाये सवाल
डॉ धर्मेंद्र सिन्हा ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी की ओर से चकाई में करीब 70 प्रतिशत धान की रोपनी होने की बात पर भी सवाल उठाया है.
उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों में अगर 70 प्रतिशत रोपनी हुई है, तब भी खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने की स्थिति में फसल का उत्पादन कैसे होगा, यह बड़ा सवाल है.
उनका कहना है कि कागजी आंकड़ों के बजाय खेतों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए. इसके लिए अधिकारियों को प्रभावित गांवों में जाकर किसानों और खेतों की स्थिति देखनी चाहिए.
किसानों के सामने बढ़ रही आर्थिक चिंता
धान की फसल प्रभावित होने का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगा. चकाई जैसे कृषि आधारित क्षेत्र में फसल खराब होने पर किसानों की आमदनी प्रभावित होगी और खेती पर लिये गये कर्ज को चुकाना भी मुश्किल हो सकता है.
किसानों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता बारिश की कमी और फसल बचाने की चुनौती है. यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो धान के उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है.
कृषि ऋण माफी और सरकारी सहायता की मांग
डॉ सिन्हा ने सरकार और जिला प्रशासन से चकाई प्रखंड की वास्तविक स्थिति का स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जांच के बाद प्रखंड को अविलंब सुखाड़ क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए.
इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित किसानों का कृषि ऋण माफ करने और उन्हें सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.
उन्होंने कहा कि किसानों को समय रहते राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है. ऐसे में प्रशासन के स्तर पर जल्द स्थिति का आकलन कर आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है.
Jamui News: अब प्रशासन के जमीनी आकलन पर नजर
चकाई में सुखाड़ घोषित करने की मांग के बीच अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है. खेतों में धान की वास्तविक स्थिति, रोपनी का क्षेत्र और बारिश की स्थिति का जमीनी आकलन इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगा.
अगर बारिश की कमी जारी रहती है, तो धान की फसल के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में प्रभावित किसानों तक समय पर राहत पहुंचाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी.
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