आर्ट एंड क्राफ्ट भवन अधूरा, कार्रवाई की मांग

अभाविप ने किया प्रदर्शन, 20 प्रतिशत दंड वसूली की मांग

झाझा. महात्मा गांधी स्मारक प्लस टू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में शिक्षा विभाग के एसएसए फंड से प्रस्तावित आर्ट एंड क्राफ्ट भवन का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है, जबकि मार्च 2024 में ही करीब 40 लाख रुपये की राशि की निकासी कर ली गयी. जून 2024 तक कार्य पूर्ण हो जाना था, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण भवन निर्माण कार्य अब भी अधर में लटका हुआ है.

इसी मुद्दे को लेकर अभाविप के सदस्यों ने शनिवार को विद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और अविलंब भवन निर्माण पूर्ण कराने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान अभाविप दक्षिण बिहार के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हरिनंदन प्रजापति ने कहा कि पूर्व प्रधानाध्यापक निवास सिंह के कार्यकाल में 15 लाख रुपये तथा वर्तमान प्रधानाध्यापक राजाराम नागमणि के कार्यकाल में 25 लाख रुपये की निकासी की गयी है. इससे विभाग और संवेदक के बीच सांठगांठ की आशंका प्रतीत होती है. अभाविप ने इस पूरे मामले की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन रचनात्मक तरीके से आंदोलन करेगा.वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सूरज बरनवाल और छात्र नेता रूपेश कुमार भारती ने कहा कि जिस भवन का निर्माण जून 2024 में ही पूरा हो जाना था, वह आज भी समस्याओं के मकड़जाल में फंसा हुआ है. बिना दरवाजा, खिड़की, इलेक्ट्रिक वायरिंग तथा अधूरी सीढ़ी और फर्श के बावजूद राशि का भुगतान कैसे संभव हुआ, यह गंभीर जांच का विषय है.बताया गया कि संवेदक ने 21 मार्च 2024 को अपने हस्ताक्षरयुक्त स्टांप पेपर में यह लिखित रूप से स्वीकार किया था कि महात्मा गांधी स्मारक प्लस टू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक निवास कुमार सिंह से तीन कमरों का भवन निर्माण का अनुबंध प्रक्रियाधीन है. कार्य 30 जून 2024 तक पूर्ण कर दिया जाएगा. साथ ही यह भी उल्लेख है कि यदि निर्धारित तिथि तक कार्य पूर्ण नहीं होता है तो पूरी राशि का 20 प्रतिशत दंड वसूला जाएगा.एबीवीपी ने विभाग से मांग की है कि उक्त शर्तों के आलोक में संवेदक से 20 प्रतिशत दंड की वसूली तत्काल की जाये, अन्यथा संगठन चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा.

बोले प्रधानाध्यापक

विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजाराम नागमणि ने कहा कि संवेदक और अभियंताओं ने उन्हें गलतफहमी में डालकर राशि की निकासी करा ली. कई बार फोन कर कार्य पूर्ण करने को कहा गया, लेकिन अब तक भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है, जो अत्यंत दुखद है.

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