सिमुलतला. आसनसोल रेल मंडल के जसीडीह–झाझा मुख्य रेलखंड के मध्य तलवा पुल पर 27 दिसंबर 2025 को हुए रेल हादसे के बाद बिखरी पड़ी 3771 बोरी सीमेंट की नीलामी को लेकर रेलवे के निर्णय पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. पहली नीलामी में जिस बोली को “सरकारी आरक्षित मूल्य से कम” बताकर रद कर दिया गया, वही सीमेंट दूसरी नीलामी में उससे भी कम कीमत पर बेच दी गयी. जानकारी के अनुसार, 15 जनवरी को हुई पहली नीलामी में व्यवसायी अजीत यादव ने सबसे ऊंची बोली 223 रुपये प्रति बोरी लगायी थी. इसके बावजूद रेलवे अधिकारियों ने इसे आरक्षित मूल्य से कम बताते हुए नीलामी रद कर दी. इससे व्यवसायियों में असंतोष भी देखा गया. इसके बाद शनिवार 24 जनवरी को दोबारा नीलामी करायी गयी. इस बार भी वही अधिकारी और वही खरीदार आमने-सामने थे, लेकिन इस बार अजीत यादव ने 223 रुपये के बजाय 205 रुपये प्रति बोरी की बोली लगायी, जिसे रेलवे ने बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया. रेलवे के इस फैसले से सरकारी खजाने को प्रति बोरी 18 रुपये का सीधा नुकसान हुआ. कुल 3771 बोरियों पर यह नुकसान लगभग 67,878 रुपये बैठता है. सवाल यह उठ रहा है कि जब 223 रुपये प्रति बोरी में रेलवे को घाटा बताया गया था, तो 205 रुपये में सौदा कैसे लाभकारी मान लिया गया? स्थानीय लोगों और व्यवसायियों का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिख रहा है. जिस बोली को पहले कम बताकर रद किया गया, अंततः उससे भी कम कीमत पर सौदा तय कर लिया गया. अब पूरे मामले में रेलवे की भूमिका और नीलामी प्रक्रिया की जांच की मांग उठने लगी
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