जर्जर पंप हाउस की छत से टपक रहा पानी, कैसे होगी जलापूर्ति

सोनो : जलापूर्ति कर लोगों के जीवन संचार में अहम भूमिका निभाने वाला पीएचइडी विभाग का जलापूर्ति केंद्र खुद इतना बीमार है कि वहां कार्य कर रहे कर्मी किसी भी वक्त हादसे का शिकार हो सकते है. यहां का न सिर्फ जलमीनार वर्षों से जर्जर पड़ा है बल्कि जलापूर्ति करने वाले पंप चालक व पंप […]

सोनो : जलापूर्ति कर लोगों के जीवन संचार में अहम भूमिका निभाने वाला पीएचइडी विभाग का जलापूर्ति केंद्र खुद इतना बीमार है कि वहां कार्य कर रहे कर्मी किसी भी वक्त हादसे का शिकार हो सकते है. यहां का न सिर्फ जलमीनार वर्षों से जर्जर पड़ा है बल्कि जलापूर्ति करने वाले पंप चालक व पंप हाउस का कमरा भी काफी जर्जर हो गया है.

बीते तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण इस भवन की हालत और अधिक खराब हो गयी है. जर्जर हो चुके छत से बारिश का पानी लगातार कमरे के भीतर टपक रहा है. छत से टपकता यह पानी कमरे में जमा हो गया है. पंच चालक मो जमाल बिछावन व अन्य सामान पर प्लास्टिक डालकर उन्हें किसी तरह भींगने से बचाने का प्रयास कर रहे है.
कमरे का पूरा फर्श पानी में डूब गया है. चौकी से नीचे उतरते ही पैर पानी में आ जा रहा है. इस हालत में रहकर वे पंप चलाकर जलापूर्ति कर रहे है. लगातार बारिश से यह जर्जर मकान धराशायी भी हो सकता है. यह जानते हुए भी पंप चालक इस कमरे में रहने को मजबूर है.
इस जर्जर कमरे के समीप कई दशक पूर्व बना जलमीनार भी बेहद जर्जर हो गया है. उसके प्लास्टर टूट-टूट कर गिरते रहते है. स्थिति को देखकर यह भी सोचा जा सकता है कि कभी यह जलमीनार गिर गया तो कितनी बड़ी क्षति हो सकती है. जलमीनार की जर्जर स्थिति के कारण ही उससे कार्य लेना बंद कर दिया गया है. जलापूर्ति केंद्र की स्थिति इतनी बदत्तर है कि यहां रहने वाले कर्मी के लिए शौचालय तक नहीं है.
उन्हें खुले में शौच जाने की विवशता है. कई दशक पूर्व निर्मित जलमीनार और कर्मियों का यह आवास रखरखाव के अभाव में ऐसा बीमार हुआ कि फिर ठीक नहीं हो सका. विभागीय उदासीनता का दंश झेल रहा इस जलापूर्ति केंद्र से जल की आपूर्ति भी पूरे वर्ष सुचारू नहीं हो पाता है.जलापूर्ति के लिए भी लोगों को कई बार प्रदर्शन और आंदोलन करना पड़ता है.
पंप चालक के कमरे की स्थिति देख कई उपभोक्ता इस बात से चिंतित है कि बारिश नहीं रुकने की स्थिति में यदि परेशान पंप चालक मजबूरन केंद्र छोड़कर चला गया तो जलापूर्ति ठप्प हो जाएगा. जहां एक ओर मुख्यमंत्री हर घर नल योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार इतनी राशि खर्च कर रही है वहीं पीएचईडी विभाग अपने पुराने जलापूर्ति केंद्र के जीर्णोद्धार के लिए क्यों सजग नहीं हो पा रही है.

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