बातचीत का अड्डा बन कर रह गया पूछताछ केंद्र

जमुई : अब अगर टिकट काउंटर से बाबू नदारद हैं तो उनके आने में जितना वक्त लगेगा उसमें चलकर थोड़ी ट्रेन में बारे में पूछताछ कर लिया जाए. अगर आप यह सोच रहे हैं तो आप जमुई स्टेशन की स्थिति से वाकिफ नहीं हैं. अगर आपको जमुई रेलवे स्टेशन पर रेलवे से संबंधित कोई भी […]

जमुई : अब अगर टिकट काउंटर से बाबू नदारद हैं तो उनके आने में जितना वक्त लगेगा उसमें चलकर थोड़ी ट्रेन में बारे में पूछताछ कर लिया जाए. अगर आप यह सोच रहे हैं तो आप जमुई स्टेशन की स्थिति से वाकिफ नहीं हैं. अगर आपको जमुई रेलवे स्टेशन पर रेलवे से संबंधित कोई भी जानकारी लेनी हो और आप इंक्वायरी काउंटर पर खड़े हैं तो आपको थोड़ी प्रतीक्षा करनी पड़ेगी. क्योंकि अंदर बैठे बाबू को पहले अपनी बातें समाप्त करने में ज्यादा दिलचस्पी होती है.

रविवार को भी पूछताछ खिड़की पर लोगों की भीड़ जमी थी. लोग यात्रा करने के लिए अपने ट्रेन के बारे में जानकारी लेना चाह रहे थे. परंतु इंक्वायरी काउंटर के अंदर बैठे कर्मी आपस में लंबी बातचीत में व्यस्त थे. जिस कारण किसी को भी उनके द्वारा जवाब नहीं दिया जा रहा था. हां, रेलवे ने एक बोर्ड की व्यवस्था जरूर इंक्वायरी काउंटर में करा दी है. जिस पर ट्रेन के नाम और नंबर लिखे होते हैं. उसके बाद अंदर बैठे कर्मी की जिम्मेदारी और जवाबदेही समाप्त हो जाती है. और वह अपने बातें करने में बिजी हो जाते हैं. जिस कारण यात्रियों को बैरंग वापस लौटना पड़ रहा था. कर्मियों की इस लापरवहपूर्ण रवैये से खासकर महिला व कम पढ़े-लिखे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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