नाम प्लस 2 विद्यालय, व्यवस्थाएं शून्य

चिंताजनक . उपेक्षा का दंश झेल रहा झाझा का एक मात्र बालिका उच्च विद्यालय बालिका उच्च विद्यालय में कुल 1442 छात्राएं हैं. लेकिन, यहां न कमरे की व्यवस्था है और न ही शिक्षकों की. यही नहीं, विद्यालय में अन्य कोई सुविधाएं भी नहीं हैं. इससे पढ़ाई तो चौपट हो ही रही है, प्रतिभाएं कुंठित भी […]

चिंताजनक . उपेक्षा का दंश झेल रहा झाझा का एक मात्र बालिका उच्च विद्यालय

बालिका उच्च विद्यालय में कुल 1442 छात्राएं हैं. लेकिन, यहां न कमरे की व्यवस्था है और न ही शिक्षकों की. यही नहीं, विद्यालय में अन्य कोई सुविधाएं भी नहीं हैं. इससे पढ़ाई तो चौपट हो ही रही है, प्रतिभाएं कुंठित भी हो रही हैं. परीक्षा के समय छात्राओं को जमीन पर बैठ कर परीक्षा देनी पड़ती है.
झाझा : नगर क्षेत्र में अवस्थित बालिकाओं के लिए +2 स्तर तक की शिक्षा देने वाली मात्र एक सरकारी संस्थान है. स्थानीय बुद्धिजीवियों ने 26 जनवरी 1968 को इसकी स्थापना की. अपने स्थापना काल से ही यह विद्यालय उपेक्षा का दंश झेलता आ रहा है. बालिकाओं की सुविधाओं का टोटा स्थापना काल से ही लगा रहा. इस विद्यालय में प्रचूर मात्रा में भवन के अभाव के अलावे, विषयवार शिक्षक, कंप्यूटर कक्ष, कंप्यूटर शिक्षक, खेल का मैदान, समुचित पेयजल व शौचालय समेत कई जरूरी संसाधनों का घोर अभाव बना हुआ है. संसाधनों के अभाव के चलते मेधा कुंठाग्रस्त हो रहा है.
विषयवार शिक्षकों के नहीं रहने के चलते छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस विद्यालय में कुल 1442 छात्राएं हैं. इस हिसाब से कमरे की व्यवस्था नहीं है. परीक्षा के समय शत-प्रतिशत छात्राओं की उपस्थिति होने पर जमीन पर बैठ कर परीक्षा देना पड़ता है.
विषयवार शिक्षकों की घोर कमी
इस विद्यालय में दशम स्तर तक हिंदी, अंग्रेजी समेत कई विषय के शिक्षक नही है. प्लस 2 स्तर के भौतिकी विज्ञान,रसायन विज्ञान, गणित के अलावा भाषा विषयों की एक भी शिक्षक नही है. दशमी स्तर के शिक्षकों द्वारा प्लस 2 की छात्राओं पढ़ा कर कागजी खानापूर्ति किया जा रहा है.इस कारण प्रतिभा कुंठाग्रस्त हो रही है.
प्रयोगशाला का भी है अभाव
विषयवार प्रयोगशाला भी इस विद्यालय में नहीं है. इस कारण छात्रा प्रायोगिक कक्षाएं से वंचित रह जाती है. जब शिक्षक नही है तो विषयवार प्रायौगिक कक्ष भी नही है. एक कमरा में विज्ञान के सभी विषयों की प्रायोगिक कक्षा बना है.विज्ञान के लिए जहां भौतिकी विज्ञान, रसायन विज्ञान,जीव विज्ञान के लिए अलग कक्ष होनी चाहिए वहीं कला विषय गृह विज्ञान, संगीत आदि के लिये प्रायिगशाला नहीं है.
बोलीं प्रभारी प्रधानाध्यापिका
प्रभारी प्रधानाध्यापिका जयंती बनर्जी ने कही की विद्यालय की समस्याओं के बाबत प्रत्येक वर्ष हमलोग विंदुवार लिखकर भेजते हैं.कोई अधिकारी निरीक्षण में आते है तो उन्हें मौखिक भी कहते है.जब सरकार सभी संसाधन मुहैया करायेगी तो छात्रा अच्छी परिणाम देने में सक्षम हो जायेगी.

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