Hajipur Teacher News : हाजीपुर के वैशाली प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय बरहटिया मझौली के शिक्षक संजय कुमार बब्बू के अवकाश का मामला सवालों के घेरे में है. शिक्षक ने अवैतनिक और रुग्णा अवकाश की मांग की थी, लेकिन प्रखंड नियोजन इकाई की ओर से 341 दिनों के अध्ययन अवकाश को मंजूरी दी गई. खास बात यह है कि स्वीकृत अध्ययन अवकाश की अवधि शिक्षक के लंबे मेडिकल लीव के बीच पड़ती है.
मेडिकल लीव के बीच अध्ययन अवकाश की स्वीकृति पर सवाल
शिक्षक संजय कुमार बब्बू के अवकाश से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं. शिक्षक ने जिस तरह के अवकाश की मांग की थी, उसके बजाय प्रखंड नियोजन इकाई की ओर से अध्ययन अवकाश स्वीकृत किए जाने को लेकर नियमों और प्रक्रिया पर चर्चा शुरू हो गई है.
शिक्षक ने मांगा था अवैतनिक और रुग्णा अवकाश
जानकारी के अनुसार संजय कुमार बब्बू ने 12 जून 2026 को बीडीओ सह प्रखंड नियोजन इकाई के सचिव को आवेदन दिया था. इसमें उन्होंने अवैतनिक अवकाश और रुग्णा अवकाश स्वीकृत करने का अनुरोध किया था.
341 दिनों के अध्ययन अवकाश की मिली मंजूरी
इसके बाद बीडीओ वैशाली की ओर से 21 जुलाई 2026 को कार्यालय ज्ञापांक-10 जारी किया गया. इसमें शिक्षक को 31 मार्च 2024 से 6 मार्च 2025 तक कुल 341 दिनों के अध्ययन अवकाश की स्वीकृति दी गई. आदेश में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को इस अवधि की प्रविष्टि शिक्षक की सेवा पुस्तिका में करने का निर्देश भी दिया गया.
मेडिकल लीव और अध्ययन अवकाश की अवधि में टकराव
मामले का अहम पहलू शिक्षक का पूर्व से मेडिकल लीव पर होना बताया जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार संजय कुमार बब्बू 1 दिसंबर 2023 से 12 जून 2026 तक चिकित्सा अवकाश पर थे. इसी अवधि के बीच 31 मार्च 2024 से 6 मार्च 2025 तक 341 दिनों का अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया गया.
एक ही अवधि के दो अलग-अलग अवकाश पर सवाल
मेडिकल लीव की अवधि के बीच अध्ययन अवकाश की मंजूरी को लेकर अब सवाल उठ रहा है कि दोनों अवकाशों की अवधि और सेवा पुस्तिका में इसकी प्रविष्टि किस आधार पर की गई. खासकर तब, जब शिक्षक ने अपने आवेदन में अवैतनिक और रुग्णा अवकाश की मांग की थी.
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शिक्षक की वास्तविक स्थिति को लेकर भी उठे सवाल
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों के अनुसार, यदि शिक्षक अध्ययन अवकाश की अवधि में पढ़ाई या परीक्षा जैसी गतिविधियों के लिए सक्षम थे, तो उनकी विद्यालय में वापसी और योगदान से जुड़े नियमों की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए. दूसरी ओर, यदि वह उस अवधि में गंभीर बीमारी के कारण मेडिकल लीव पर थे, तो उसी अवधि को अध्ययन अवकाश के रूप में स्वीकृत किए जाने की प्रक्रिया की जांच जरूरी हो सकती है.
नियमों के पालन को लेकर स्पष्टता जरूरी
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि शिक्षक के अवकाश की अलग-अलग श्रेणियों को किस आधार पर स्वीकृति दी गई और सेवा पुस्तिका में किस तरह दर्ज किया गया. मामले की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं.
दस्तावेजों से सामने आएगा पूरा मामला
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर शिक्षक के मेडिकल लीव और अध्ययन अवकाश की अवधि में स्पष्ट ओवरलैप दिखाई दे रहा है. ऐसे में संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से रिकॉर्ड की जांच और नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा.
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