सतिहारा मंदिर परिसर में स्थित वृक्ष आस्था और विरासत का प्रतीक, ग्रामीणों ने बीडीओ-एसडीओ को सौंपा आवेदन

महनार के सतिहारा मंदिर परिसर में स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने पीपल के पेड़ को बचाने के लिए ग्रामीणों ने प्रशासन से कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है।

Hajipur News : महनार प्रखंड की अल्लीपुर हट्टा पंचायत के मोखतारपुर गांव स्थित प्रसिद्ध सतिहारा मंदिर परिसर में मौजूद सैकड़ों वर्ष पुराने विशाल पीपल के वृक्ष को बचाने के लिए ग्रामीणों ने अभियान शुरू किया है. ग्रामीणों का कहना है कि यह वृक्ष वर्षों से क्षेत्रवासियों की आस्था का केंद्र रहा है, लेकिन गंगा नदी के कटाव और लगातार हो रही बारिश के कारण मिट्टी का क्षरण होने से अब यह गिरने के कगार पर पहुंच गया है.

ग्रामीणों के अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस विशाल वृक्ष के संरक्षण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है. समय रहते कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया तो क्षेत्र की यह महत्वपूर्ण प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत हमेशा के लिए खत्म हो सकती है.

मिट्टी भराई और चबूतरा निर्माण की मांग

वृक्ष को बचाने के लिए स्थानीय ग्रामीण ध्रुव सिंह, नवल किशोर सिंह 'विरप्पन', गणेश सिंह, ठाकुर विवेक सिंह, नारायण सिंह, रंजीत सिंह, अमरेश कुमार सिंह, रत्नेश सिंह, अशोक सिंह और सरोज कुमार सिंह ने प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन दिया है. ग्रामीणों ने मनरेगा अथवा किसी अन्य सरकारी योजना के तहत पीपल के वृक्ष की जड़ों के आसपास मिट्टी भराई कराने, चबूतरा निर्माण करने तथा गंगा कटाव को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग की है.

आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक

ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील करते हुए कहा कि यह विशाल पीपल का वृक्ष महज एक पेड़ नहीं है, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रतीक है. गंगा कटाव के कारण इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है. यदि समय रहते संरक्षण कार्य शुरू नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस विरासत से वंचित हो सकती हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक कटावरोधी एवं संरक्षण कार्य कराने की मांग की है.


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By Prabhat khabar news desk

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