हाजीपुर: पातेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में 24 घंटे के भीतर दो नवजात की मौत के मामले की जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची. जांच के दौरान सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुरेंद्र पासवान ड्यूटी से गायब मिले. टीम ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया और भर्ती मरीजों से बातचीत कर स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी ली. इसके बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से भी आवश्यक पूछताछ की गयी.
जांच टीम के सीएचसी पहुंचने के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे. इस पर टीम के अधिकारियों ने उन्हें सभी आवश्यक साक्ष्यों के साथ सदर अस्पताल में उपस्थित होने का निर्देश दिया. जांच टीम ने सीएचसी की चिकित्सा व्यवस्था में कई कमियां भी पायीं. टीम के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में व्यवस्था की कमी और चिकित्सा प्रबंधन से जुड़े सवाल नवजातों की मौत के मामले में सामने आए हैं.
क्या है पातेपुर सीएचसी में नवजात की मौत का मामला
बताया जाता है कि 3 जून की देर रात बलिगांव थाना क्षेत्र के इमादपुर गांव निवासी विक्रम कुमार की पत्नी दौलत कुमारी को प्रसव के लिए पातेपुर सीएचसी में भर्ती कराया गया था. महिला ने सामान्य प्रसव से एक पुत्र को जन्म दिया था. जन्म के समय नवजात का वजन करीब डेढ़ किलोग्राम से अधिक था.
जन्म के बाद नवजात की तबीयत बिगड़ने पर ड्यूटी में तैनात डॉक्टर ने बच्चे को देखे बिना ही सदर अस्पताल रेफर कर दिया. परिजनों के अनुसार समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण नवजात की मौत हो गयी. घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया था.
परिजनों ने आरोप लगाया था कि प्रसव के समय अस्पताल में सिर्फ दो महिला स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थीं, जबकि डॉक्टर ड्यूटी से गायब थे. बताया गया कि घटना वाले दिन अस्पताल के रोस्टर में रात की ड्यूटी के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुरेंद्र पासवान का नाम दर्ज था. इसके बावजूद उनके अस्पताल में मौजूद नहीं रहने का आरोप लगाया गया.
एक दिन पहले भी हुई थी नवजात की मौत
बताया गया कि इस घटना से एक दिन पहले बकाढ़ गांव की एक महिला के प्रसव के बाद भी नवजात की मौत हो गयी थी. लगातार दो नवजातों की मौत के बाद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे.
नवजात की मौत के मामले में पीड़िता दौलत कुमारी ने जिलाधिकारी, सिविल सर्जन और अन्य वरीय अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी. शिकायत में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गयी थी.
शिकायत के बाद सिविल सर्जन ने गठित की जांच टीम
शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ. श्याम नंदन प्रसाद ने मामले की जांच के लिए सदर अस्पताल के गैर संचारी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके साहु के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की.
जांच टीम पातेपुर सीएचसी पहुंची और अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया. टीम के सदस्यों ने मरीजों से बातचीत कर अस्पताल में मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली. इसके अलावा डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से भी घटना से जुड़े तथ्यों के बारे में पूछताछ की गयी.
जांच टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. आरके साहु ने बताया कि जांच के लिए आने की सूचना प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पहले ही दी गयी थी. इसके बावजूद वह सीएचसी में मौजूद नहीं मिले. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान अस्पताल में कई खामियां सामने आयी हैं.
अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
जांच के दौरान मरीजों से पूछताछ में अस्पताल की व्यवस्था को लेकर भी कई शिकायतें सामने आयीं. मरीजों ने चिकित्सा सुविधाओं और अस्पताल की व्यवस्था को लेकर अपनी समस्याएं बतायीं.
जांच टीम ने मरीजों को रेफर किए जाने की प्रक्रिया पर भी जानकारी ली. अधिकारियों ने बताया कि किसी भी मरीज को रेफर करने की निर्धारित प्रक्रिया होती है. नियम के अनुसार हाई रिस्क वाले मरीजों को आवश्यकता के आधार पर रेफर किया जाना चाहिए.
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को सदर अस्पताल बुलाया गया
जांच टीम के अधिकारी डॉ. आरके साहु ने बताया कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के अनुपस्थित रहने के कारण जांच पूरी नहीं हो सकी. उन्हें सभी आवश्यक साक्ष्यों के साथ सदर अस्पताल में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है.
जांच टीम प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से पूछताछ और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को सौंपेगी. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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