केला सिर्फ फल नहीं, कमाई का बड़ा जरिया! हाजीपुर में किसानों को बताए गए प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन के तरीके

केला सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि किसानों के लिए आय और रोजगार का बड़ा जरिया बन सकता है. केवीके हरिहरपुर में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला ने केला उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़े उद्यमिता के अवसरों पर प्रकाश डाला.

Banana Production: केवीके हरिहरपुर परिसर में सोमवार को केला उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता के अवसर विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला-सह-जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का संचालन प्रधान डॉ अनिल कुमार सिंह के दिशानिर्देशन में इं कुमारी नम्रता द्वारा किया जा रहा है.

कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ एसके ठाकुर, डॉ अनिल कुमार सिंह, डॉ जूना दाखवा, कविता वर्मा, इं कुमारी नम्रता एवं प्रगतिशील किसान अवधेश सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

इसके बाद डॉ अनिल कुमार सिंह ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़े सभी वैज्ञानिकों एवं अतिथियों का स्वागत किया. उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केला केवल एक फल नहीं है, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, विपणन और उद्यमिता तक किसानों के लिए रोजगार एवं आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है.

केला उत्पादन से उद्यमिता तक पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभिन्न वैज्ञानिकों ने केला उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, उत्पाद विकास, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की. वैज्ञानिकों ने कहा कि किसानों को केवल केला उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय उसके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने बताया कि केले के फल के साथ-साथ इसके तने, पत्तियों और अन्य सह-उत्पादों का उपयोग कर विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है.

केले के सह-उत्पादों से रोजगार के अवसर

वैज्ञानिकों ने कहा कि केले के तने, पत्तियों और अन्य हिस्सों का बेहतर उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर पर कई तरह के उद्यम विकसित किए जा सकते हैं. इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण युवाओं और अन्य लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं.

कार्यशाला में वैल्यू चेन को मजबूत करने, उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया.

किसानों को मूल्य संवर्धन की जानकारी देने का प्रयास

पांच दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और प्रतिभागियों को केला उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और उद्यमिता से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी देना है. विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को केले से जुड़े विभिन्न उत्पादों, उनके बाजार और व्यवसाय की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है.

कार्यक्रम के अंत में इं कुमारी नम्रता ने सभी विशेषज्ञों, अतिथियों, वैज्ञानिकों, प्रतिभागियों और सहयोगी कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया.

कार्यक्रम को सफल बनाने में इशिता सिंह, अंशुमान द्विवेदी, ऋचा श्रीवास्तव, सोनू कुमार, रमाकांत, दीपक, मोहित और आरती सहित अन्य कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.

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By राहुल कुमार राय

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